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Pithoragarh News: पहाड़ में परिवहन की दुर्दशाः बे-बस हैं पह़ाड़ के यात्री
Mon, 25 Sep 2023 11:09 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 25 Sep 2023 11:09 PM IST
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पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो।
पिथौरागढ़। परिवहन निगम के पास सीमांत जिले के लोगों के लिए डीलक्स तो दूर एक सेमी डीलक्स बस तक नहीं है। यात्रियों को देहरादून और दिल्ली के लिए भी खटारा बस पर सफर करना पड़ रहा है। 62 बेड़े वाले पिथौरागढ़ डिपो की अधिकांश बस खराब हालत में हैं। गुरुग्राम, दिल्ली, देहरादून, बरेली और स्थानीय स्तर पर संचालित बस चलते-चलते खराब हो जाती हैं।
पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो के पास बेड़े में 2022 तक 72 बस थीं। 10 बस के पहाड़ में मानक पूरे होने के बाद बस बेड़ा 62 का रह गया है। इनमें 45 बस 2016 मॉडल की हैं। पहाड़ और मैदानी क्षेत्र में दौड़ते-दौड़ते 2016 की अधिकांश बस खस्ताहाल हो गई हैं। कमी से जूझ रहे डिपो को खटारा बस दौड़ानी पड़ रही हैं। वर्कशॉप में इनकी मरम्मत तो की जाती है।
दिल्ली और देहरादून का 17 से 18 घंटा का सफर लोगों के लिए मुश्किल भरा हो जाता है। तकनीकी समस्या के चलते बस कभी भी चलते-चलते जवाब दे जाती हैं। ऐसे में यात्रियों को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ता है। घंटों तेज धूप में इंतजार करना यात्रियों के लिए किसी सजा से कम नहीं होता है।
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62 बस रोटेशन के अनुसार चलाई जाती हैं। वर्कशॉप में जांच के बाद ही इन्हें संचालन के लिए भेजा जाता है। शासन से 10 बस मिलनी हैं। कब तक मिलेंगी इसकी जानकारी नहीं है। - रविशेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़।
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17 बस 2019 मॉडल की
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो के पास 17 बस 2019 मॉडल की हैं। यह बस भी अच्छी हालत में नहीं हैं। मैदानी और पहाड़ी क्षेत्र में संचालन के बाद इनमें तकनीकी समस्या आती रहती है। बस की कमी से जूझ रहे डिपो के लिए इन बस की तकनीकी समस्या भी बड़ी मुसीबत है। न जाने कौन से बस कब खराब हो जाए। संवाद
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महज 32 बस के सहारे लोहाघाट डिपो
नवल जोशी
लोहाघाट (चंपावत)। चंपावत जिले के पर्वतीय मार्ग का एकमात्र लोहाघाट का रोडवेज डिपो बस की भारी कमी से जूझ रहा है। बस की कमी के चलते समय समय पर कई रूटों पर बसों का संचालन बंद करना पड़ रहा है। समय पर बस नहीं मिलने से यात्रियों को दिक्कत होती है। दो माह बाद डिपो की अधिकांश बस पर्वतीय मार्ग में चलने के अपने निर्धारित मानक पूरी कर लेंगी।
लोहाघाट डिपो में वर्तमान में 32 गाडिय़ां हैं, जिनमें से समय समय पर कई बस खराब होने से उनका संचालन बंद रहता है। सामान्य तौर पर आठ रूट पर डिपो की ओर से 15 बस का संचालन किया जाता है। त्योहारी सीजन, सेना आदि भर्ती के दौरान बस की कमी के चलते युवाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बाक्स
इन रूट पर चलती हैं बस
दिल्ली पांच, देहरादून तीन, बरेली दो, गुरुग्राम, ऋषिकेश, काशीपुर, हल्द्वानी, नैनीताल के लिए एक-एक बस का संचालन होता है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए कोई बस सेवा का संचालन न होने से बुजुर्गों, दिव्यांगों, छात्राओं को नि:शुल्क यात्रा का लाभ नहीं मिल पाता है।
कोट
लोहाघाट डिपो की कार्यशाला में इंजन आदि के बड़े कार्य न होने के चलते उन्हें मरम्मत के लिए क्षेत्रीय कार्यालय टनकपुर भेजा जाता है। वर्तमान में इंजन की खराबी के चलते एक बस लोहाघाट तथा चार बस टनकपुर में है। जिन्हें जल्द सही कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। बस की खराबी के चलते काशीपुर, बरेली, दिल्ली की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। - शंकर पाल, वरिष्ठ लिपिक रोडवेज
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पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो के पास बेड़े में 2022 तक 72 बस थीं। 10 बस के पहाड़ में मानक पूरे होने के बाद बस बेड़ा 62 का रह गया है। इनमें 45 बस 2016 मॉडल की हैं। पहाड़ और मैदानी क्षेत्र में दौड़ते-दौड़ते 2016 की अधिकांश बस खस्ताहाल हो गई हैं। कमी से जूझ रहे डिपो को खटारा बस दौड़ानी पड़ रही हैं। वर्कशॉप में इनकी मरम्मत तो की जाती है।
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दिल्ली और देहरादून का 17 से 18 घंटा का सफर लोगों के लिए मुश्किल भरा हो जाता है। तकनीकी समस्या के चलते बस कभी भी चलते-चलते जवाब दे जाती हैं। ऐसे में यात्रियों को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ता है। घंटों तेज धूप में इंतजार करना यात्रियों के लिए किसी सजा से कम नहीं होता है।
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62 बस रोटेशन के अनुसार चलाई जाती हैं। वर्कशॉप में जांच के बाद ही इन्हें संचालन के लिए भेजा जाता है। शासन से 10 बस मिलनी हैं। कब तक मिलेंगी इसकी जानकारी नहीं है। - रविशेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़।
17 बस 2019 मॉडल की
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो के पास 17 बस 2019 मॉडल की हैं। यह बस भी अच्छी हालत में नहीं हैं। मैदानी और पहाड़ी क्षेत्र में संचालन के बाद इनमें तकनीकी समस्या आती रहती है। बस की कमी से जूझ रहे डिपो के लिए इन बस की तकनीकी समस्या भी बड़ी मुसीबत है। न जाने कौन से बस कब खराब हो जाए। संवाद
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महज 32 बस के सहारे लोहाघाट डिपो
नवल जोशी
लोहाघाट (चंपावत)। चंपावत जिले के पर्वतीय मार्ग का एकमात्र लोहाघाट का रोडवेज डिपो बस की भारी कमी से जूझ रहा है। बस की कमी के चलते समय समय पर कई रूटों पर बसों का संचालन बंद करना पड़ रहा है। समय पर बस नहीं मिलने से यात्रियों को दिक्कत होती है। दो माह बाद डिपो की अधिकांश बस पर्वतीय मार्ग में चलने के अपने निर्धारित मानक पूरी कर लेंगी।
लोहाघाट डिपो में वर्तमान में 32 गाडिय़ां हैं, जिनमें से समय समय पर कई बस खराब होने से उनका संचालन बंद रहता है। सामान्य तौर पर आठ रूट पर डिपो की ओर से 15 बस का संचालन किया जाता है। त्योहारी सीजन, सेना आदि भर्ती के दौरान बस की कमी के चलते युवाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बाक्स
इन रूट पर चलती हैं बस
दिल्ली पांच, देहरादून तीन, बरेली दो, गुरुग्राम, ऋषिकेश, काशीपुर, हल्द्वानी, नैनीताल के लिए एक-एक बस का संचालन होता है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए कोई बस सेवा का संचालन न होने से बुजुर्गों, दिव्यांगों, छात्राओं को नि:शुल्क यात्रा का लाभ नहीं मिल पाता है।
कोट
लोहाघाट डिपो की कार्यशाला में इंजन आदि के बड़े कार्य न होने के चलते उन्हें मरम्मत के लिए क्षेत्रीय कार्यालय टनकपुर भेजा जाता है। वर्तमान में इंजन की खराबी के चलते एक बस लोहाघाट तथा चार बस टनकपुर में है। जिन्हें जल्द सही कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। बस की खराबी के चलते काशीपुर, बरेली, दिल्ली की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। - शंकर पाल, वरिष्ठ लिपिक रोडवेज