उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश के बाद मौसम खिल गया है। निचले क्षेत्रों से पहाड़ चांदी की तरह चमकते हुए नजर आ रहे हैं। बर्फबारी और बारिश के बाद तापमान में गिरावट भी दर्ज की गई है। लंबे समय बाद बारिश और बर्फबारी होने से लोगों को सूखी ठंड से राहत मिली है।
बर्फबारी के बाद खिल उठी वादियां: धूप में चांदी की तरह चमक उठे पहाड़, तस्वीरें मोह लेंगी आपका मन
उत्तराखंड में आज मौसम का मिजाज बदला-बदला रहा। यहां पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश के बाद मौसम खिल गया है। बर्फबारी और बारिश के बाद तापमान में गिरावट भी दर्ज की गई है।
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बर्फबारी के ओम पर्वत और आदि कैलास में वाहनों की आवाजाही घटी
आदि कैलाश और ओम पर्वत में बर्फबारी के बाद सड़कों में वाहनों की आवाजाही घट गई है। सुरक्षा एजेंसियों के फोर बाई फोर वाहन ही आवाजाही कर रहे हैं। स्थानीय निवासी सुमित गुंज्याल ने बताया की नाभीढांग और ओम पर्वत में भी एक फुट से अधिक हिमपात हुआ है। वहीं सीमा सुरक्षा बल के जवान बर्फबारी में भी मुस्तैदी से सीमा की सुरक्षा में लगे हुए हैं।
किसानों और काश्तकारों को मिली राहत
सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लंबे समय से बारिश नहीं होने से किसान और काश्तकार परेशान थे। क्योंकि यहां सिंचाई के लिए अधिकतर किसान और काश्तकार बारिश पर ही निर्भर हैं। जिले भर में 42 हजार हेक्टेयर भूमि में खेती की जाती है। जिसमें सिर्फ 37 हजार हेक्टेयर में ही सिंचाई की सुविधा है। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण रबी की फसल खराब हो रही थी। बारिश के बाद फसल के सहीं होने की उम्मीद है।
पिथौरागढ़- 7.00
देवलथल- 4.00
मुनस्यारी- 3.6
धारचूला-2.00
गंगोलीहाट-2.00
कनालीछीना- 1.50
तेजम- 1.00
थल- 1.00
डीडीहाट-0.8
बेड़ीनाग- 0.7
सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लंबे समय से बारिश नहीं होने से किसान और काश्तकार परेशान थे। क्योंकि यहां सिंचाई के लिए अधिकतर किसान और काश्तकार बारिश पर ही निर्भर हैं। जिले भर में 42 हजार हेक्टेयर भूमि में खेती की जाती है। जिसमें सिर्फ 37 हजार हेक्टेयर में ही सिंचाई की सुविधा है। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण रबी की फसल खराब हो रही थी। बारिश के बाद फसल के सहीं होने की उम्मीद है।