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पिथौरागढ़ में 30 हजार के पार पहुंचे रेत के दाम
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 07 Aug 2018 10:48 PM IST
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पिथौरागढ़ में लगे रेत के ढेर
- फोटो : अमर उजाला
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नदियों में खनन बंद होने और भंडार की समुचित व्यवस्था नहीं होने से जिला मुख्यालय में रेत के दाम आसमान छू रहे हैं। चंपावत जिले से आने वाली रेत तो 30 हजार प्रति टिप्पर के पार पहुंच गई है। इससे भवन निर्माण कर रहे लोग भी परेशान हैं।
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बरसात के सीजन में नदियों से खनन बंद है। जिले में बने रेत, बजरी भंडार का स्टॉक भी नहीं खुला है। इसके चलते जिले में चंपावत से रेत, बजरी आ रही है। रेत के दाम कुछ दिनों पहले तक 18 से 20 हजार प्रति टिप्पर (4 घनमीटर 140 कट्टे) तो वर्तमान में यह 30 हजार रुपये के पार पहुंच गए हैं। बाहर से आने वाली रेत के दामों पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। जिले में नाचनी, तीतरी और जाखपंत में उपखनिज के भंडार हैं, बावजूद इनको अभी खोला नहीं गया है।
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चंपावत जिले में 60 भंडार हैं। चल्थी और आसपास में 20 से 25 भंडार हैं, जिनसे रेत यहां पहुंच रही है। रेत का दाम और भाड़ा लगने के बाद यह दो से ढाई गुना अधिक दामों पर पिथौरागढ़ में बिक रही है। बताया जाता है कि चल्थी में भी अब रेत का स्टॉक कम हो गया है जिसके चलते इसके दाम काफी अधिक बढ़ गए हैं। बहरहाल महंगा बिक रहे रेत ने जीवन भर की कमाई बचा कर मकान का सपना देख रहे लोगों की नींद उड़ा दी है।
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दो-चार दिनों में राहत मिलने की उम्मीद
पिथौरागढ़। खान अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि पिथौरागढ़ में अभी बौतड़ी, चल्थी और सिमलखेत से रेत आ रहा है। उन्होंने बताया कि दो-चार दिनों में जिले के तीनों भंडारण केंद्र खुल जाएंगे। बताया कि नाचनी में 14 हजार टन, तीतरी में दो हजार टन और जाखपंत में 800 टन रेत का भंडारण है। तीनों के खुलने से अगले दो माह तक रेत, बजरी की कोई दिक्कत नहीं होगी।