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Pithoragarh News: सूखी ठंड से लोग परेशान, रबी की फसल और बागवानी पर असर
Tue, 21 Nov 2023 10:34 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 21 Nov 2023 10:34 PM IST
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बारिश नहीं होने से इस तरह सूख रही है रबी की फसल। संवाद
पिथौरागढ़। पिछले तीन साल से (सितंबर, अक्तूबर और नवंबर में) कम बारिश होने से रबी की फसल और बागवानी पर असर पड़ रहा है। लगातार गिर रहे पाले के कारण बागवानी को भी नुकसान हो रहा है। सूखी ठंड का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।
सीमांत जिले पिथौरागढ़ में 42 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है। इसमें 3700 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा है। शेष क्षेत्र मौसमी बारिश पर निर्भर है। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण रबी की फसल पर खासा असर पड़ रहा है।
बीज अंकुरित तो हो गए हैं लेकिन पानी नहीं मिलने के कारण पौधे पीले पड़ने लग गए हैं। इसी तरह बागवानी को भी असर पड़ रहा है। पाले से फसलों को और नुकसान हो रहा है। जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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पिछले तीन वर्षों में हुई बारिश
सीमांत जिले पिथौरागढ़ में वर्ष 2020 में 543.1 मिमी बारिश हुई। अक्तूबर में 2020 में 0.1 मिमी बारिश, नवंबर में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई। सितंबर 2021 में 1462.6 मिमी बारिश हुई। अक्तूबर में 865.6 और नवंबर में 4.70 मिमी बारिश हुई। सितंबर 2022 में 1950.6, अक्तूबर में 1075.9 और नवंबर में 1.70 मिमी बारिश हुई। इसी तरह वर्ष 2023 सितंबर में 1319.1, अक्तूबर में 373.7 और नवंबर 2023 में अभी तक एक भी बूंद बारिश नहीं हुई है। बारिश नहीं होने से किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन गिरने की आशंका है।
रबी की फसलें पड़ने लगीं पीली
पिथौरागढ़। पानी के अभाव में रबी की फसलें पीली पड़ने लग गई है। खेत हरे के स्थान पर भूरे दिखाई दे रहे हैं। पहाड़ों में अधिकतर किसान वर्षाजल पर निर्भर हैं। बारिश नहीं होने से हर वर्ष किसानों को रबी की फसल के उत्पादन में गिरावट देखने को मिलती है। संवाद
कोट
अभी खेतों में नमी है नवंबर प्रथम सप्ताह तक बारिश होनी अनिवार्य है। नाइट्रोजन के कारण फसलें पीली पड़ रही होंगी। किसानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। - रितु टम्टा, मुख्य कृषि अधिकारी पिथौरागढ़।
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सीमांत जिले पिथौरागढ़ में 42 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है। इसमें 3700 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा है। शेष क्षेत्र मौसमी बारिश पर निर्भर है। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण रबी की फसल पर खासा असर पड़ रहा है।
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बीज अंकुरित तो हो गए हैं लेकिन पानी नहीं मिलने के कारण पौधे पीले पड़ने लग गए हैं। इसी तरह बागवानी को भी असर पड़ रहा है। पाले से फसलों को और नुकसान हो रहा है। जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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पिछले तीन वर्षों में हुई बारिश
सीमांत जिले पिथौरागढ़ में वर्ष 2020 में 543.1 मिमी बारिश हुई। अक्तूबर में 2020 में 0.1 मिमी बारिश, नवंबर में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई। सितंबर 2021 में 1462.6 मिमी बारिश हुई। अक्तूबर में 865.6 और नवंबर में 4.70 मिमी बारिश हुई। सितंबर 2022 में 1950.6, अक्तूबर में 1075.9 और नवंबर में 1.70 मिमी बारिश हुई। इसी तरह वर्ष 2023 सितंबर में 1319.1, अक्तूबर में 373.7 और नवंबर 2023 में अभी तक एक भी बूंद बारिश नहीं हुई है। बारिश नहीं होने से किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन गिरने की आशंका है।
रबी की फसलें पड़ने लगीं पीली
पिथौरागढ़। पानी के अभाव में रबी की फसलें पीली पड़ने लग गई है। खेत हरे के स्थान पर भूरे दिखाई दे रहे हैं। पहाड़ों में अधिकतर किसान वर्षाजल पर निर्भर हैं। बारिश नहीं होने से हर वर्ष किसानों को रबी की फसल के उत्पादन में गिरावट देखने को मिलती है। संवाद
कोट
अभी खेतों में नमी है नवंबर प्रथम सप्ताह तक बारिश होनी अनिवार्य है। नाइट्रोजन के कारण फसलें पीली पड़ रही होंगी। किसानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। - रितु टम्टा, मुख्य कृषि अधिकारी पिथौरागढ़।