खोतिला के लोग अब धूल से परेशान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो महीने से भी ज्यादा समय से भूस्खलन के कारण परेशानी झेल रहे खोतिला के लोगों की आफत कम नहीं हो रही है। प्रशासन अब तक गांव के लिए रास्ते का निर्माण नहीं कर पाया है। गांव के ठीक ऊपर से पीएमजीएसवाई की सड़क की कटिंग के कारण निकल रही धूल और मलबा लोगों के लिए नई मुसीबत पैदा कर रही है। सड़क निर्माण के समय निकल रहा मलबा ठीक उसी स्थान पर फेंका जा रहा है, जहां से लोग आवाजाही करते हैं। वहीं, रास्ता टूटने के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों को 800 मीटर की दूरी तय करने के लिए चार किलोमीटर घूमकर आना पड़ रहा है। उसमें भी धूल के कारण उनके लिए आफत हो रही है।
चार अक्तूबर को खोतिला के पास भारी भूस्खलन हुआ था। इससे पैदल रास्ता टूट गया और पेयजल लाइन ध्वस्त हो गई थी। जल संस्थान ने पेयजल लाइन की मरम्मत तो कर दी है, लेकिन रास्ते का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है। शासन की अनदेखी से लोग इसलिए भी खफा हैं कि उसने रास्ते की मरम्मत करने के बजाए पहले मलबा हटाने के लिए 57 लाख रुपए की राशि जारी कर दी है, जबकि मलबा सीधे महाकाली में गिर चुका था।
विगत दिनों लोक निर्माण विभाग के सचिव अरविंद ह्यांकी ने भी क्षेत्र का दौरा कर अधिकारियों को शीघ्र रास्ता बनाने का निर्देश दिया, मगर उनके देहरादून जाते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया। खोतिला युवा संगठन के अध्यक्ष कृष्ण सिंह नपलच्याल ने कहा कि विगत दिनों खोतिला के लोगों ने मुख्य बाजार में चक्काजाम किया तथा प्रशासन के साथ हुई वार्ता में अस्थायी संपर्क मार्ग की मांग की थी। सरकार ने रास्ते का निर्माण तो नहीं किया, लेकिन कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए 57 लाख रुपए की राशि मलबा हटाने के नाम पर जारी कर दी। उनका कहना है कि भूस्खलन के साथ निकला सारा मलबा महाकाली में गिरा हुआ है। वहां से धीरे-धीरे वह नदी के साथ बहता जा रहा है। ऐसे में मलबा कहां से हटाया जाएगा यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि दो महीने बाद भी 800 मीटर लंबे रास्ते का निर्माण न होना सरकारी तंत्र की विफलता को सामने लाता है।