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गुरुग्राम से लौटे प्रवासियों ने पिथौरागढ़ में केले के छिलके खाकर गुजारी रात
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संवाद न्यूज एजेंसी पिथौरागढ़। गुड़गांव से आए लोगों ने कहा कि उन्हें घर आते वक्त हरियाणा के अलावा कहीं भी खाना नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ पहुंचने के बाद उन्हें केले के छिलके खाकर रात गुजारनी पड़ी। उनका कहना है कि जेब में कुछ पैसे थे सोचा बाजार से खाने को खरीदू लेकिन उन्हें सामान खरीदने के लिए बाहर नहीं जाने दिया। सोमवार को देवसिंह मैदान में घरों को वापस जाने के लिए वाहनों का इंजतार कर रहे लोगों का कहना है कि गुड़गांव से यहां पहुंचने तक उन्हें खाना नहीं मिला। उन्होंने कहा कि गुड़गांव में रहने खाने की व्यवस्था भी अपने पैसे से कर रहे थे। उन्होंने कहा गुड़गांव से लौटे अधिकतर युवा होटलों में कार्य कर रहे थे। लॉकडाउन के बाद उन्हें होटल स्वामियों ने पैसे भी नहीं दिए। कहा वो दर-दर की ठोकरे खाकर यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा घर वापसी के वक्त उन्होंने हरियाण में खाना खाया। इसके बाद जिन लोगों के पास पैसे थे उन्होंने रास्ते में खाना खाया। उनका कहना है। पिथौरागढ़ पहुंचने के बाद उन्हें खाना पानी मिलने की उम्मीदें थी। लेकिन उन्हें खाने के लिए सिर्फ केले मिले। कई लोगों को खाने के लिए केले भी नहीं मिले इसलिए उन्होंने केले के छिलके खाकर रात गुजारी। इससे लोगों में जिला प्रशासन के प्रति आक्रोश है।
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--- बोले लोग ::- गुड़गांव में होटल में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद होटल के बंद होने से वो पूरी तरह बेरोजगार हो गए। किसी तरह उन्होंने गुड़गांव में दर-दर की ठोकरे खाकर पेट पाला। घर वापसी के वक्त हरियाणा पुलिस ने उन्हें खाना खिलाया। पिथौरागढ़ पहुंचने के बाद उन्होंने केले के छिलके खाकर रात गुजारी। -सुंदर सिंह महरा।
--"गुड़गांव के होटल में काम करता था। लॉकडाउन के बाद होटल स्वामी ने उन्हें पैसे भी नहीं दिए। पिथौरागढ़ पहुंचने के बाद वो रात भर भूखे रहे। पानी पीकर पूरी रात गुजारी इसके बाद शासन-प्रशासन को हमारा दर्द नहीं दिखा। - चंदन पंवार।
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-- "गुड़गांव के एक होटल में काम करता था। पूरे परिवार के साथ घर बुंगली को जा रहा हूं। बीती रात से आठ साला का लड़का, पत्नी और खुद भूखी है। सुबह से खाने का इंजतार कर रहे थे। लेकिन उन्हें खाना नहीं मिल पाया।" - नरेंद्र सिंह। पहुंचने के बाद भी खाना नहीं मिल पाया।
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