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Pithoragarh News: नहीं मिल रहा बाजार, बर्बाद हो रहीं सब्जियां
Fri, 27 Jun 2025 11:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 27 Jun 2025 11:38 PM IST
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। किसानों की आय दोगुना करने के दावे हो रहे हैं जो धरातल पर बेअसर हैं। जी तोड़ मेहनत कर सब्जी उत्पादन करने वाले क्षेत्र के किसान इसका प्रमाण हैं। यहां के कई गांव सब्जी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। विपणन की उचित व्यवस्था नहीं होने से उत्पादों को उचित बाजार नहीं मिल रहा है। उत्पाद खेतों में बर्बाद हो रहे हैं या किसान इन्हें औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर हैं।
बेड़ीनाग क्षेत्र के जजूट और दौलाबलिया के 100 से अधिक परिवारों की आजीविका का स्रोत सब्जी और फल उत्पादन है। इन दिनों खेतों में शिमला मिर्च, बैंगन, तुरई आदि सब्जी का उत्पादन खूब हुआ है। आडू सहित अन्य फलों से पेड़ लहलहा रहे हैं। किसानों के पास इन उत्पादों को सात से 14 किलोमीटर दूर गंगोलीहाट पहुंचाकर सड़क किनारे बैठकर इन्हें बेचने के अलावा अन्य विकल्प नहीं है।
वाहनों का भाड़ा और पूरे दिन की मेहनत इन उत्पादों से वसूल करना मुश्किल हो रहा है। उत्पादों को उचित बाजार न मिलने से किसान इन्हें बेहद कम दामों में बेचने के लिए मजबूर हैं। दौला बलिया के भूपेंद्र कुमार, जजूट के दिनेश, आनंद, मजो राम, जगत, नवीन, महिपाल, राजू कहते हैं कि उचित बाजार न मिलने से लागत भी नहीं मिल रही है। कई किसान इन उत्पादों को बाजार लाने से हाथ पीछे खींच रहे हैं और ये खेतों में बर्बाद हो रहे हैं।
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बेड़ीनाग क्षेत्र के जजूट और दौलाबलिया के 100 से अधिक परिवारों की आजीविका का स्रोत सब्जी और फल उत्पादन है। इन दिनों खेतों में शिमला मिर्च, बैंगन, तुरई आदि सब्जी का उत्पादन खूब हुआ है। आडू सहित अन्य फलों से पेड़ लहलहा रहे हैं। किसानों के पास इन उत्पादों को सात से 14 किलोमीटर दूर गंगोलीहाट पहुंचाकर सड़क किनारे बैठकर इन्हें बेचने के अलावा अन्य विकल्प नहीं है।
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वाहनों का भाड़ा और पूरे दिन की मेहनत इन उत्पादों से वसूल करना मुश्किल हो रहा है। उत्पादों को उचित बाजार न मिलने से किसान इन्हें बेहद कम दामों में बेचने के लिए मजबूर हैं। दौला बलिया के भूपेंद्र कुमार, जजूट के दिनेश, आनंद, मजो राम, जगत, नवीन, महिपाल, राजू कहते हैं कि उचित बाजार न मिलने से लागत भी नहीं मिल रही है। कई किसान इन उत्पादों को बाजार लाने से हाथ पीछे खींच रहे हैं और ये खेतों में बर्बाद हो रहे हैं।
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