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इस अस्पताल की बीमारी मरीजों के रोग से भी अधिक पीड़ादायक

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 12:04 AM IST
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People face problem due to lack of  Doctors.
खुशाल दिगारी, स्थानीय। - फोटो : PITHORAGARH
कनालीछीना (पिथौरागढ़)। कनालीछीना बाजार में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) है तो अस्पताल मगर खुद बीमार है। बीमारी भी ऐसी जो वहां पहुंचने वाले मरीजों की पीड़ा से भी अधिक तकलीफदेह है। बीमारी लाइलाज नहीं है। बस इलाज करने की मंशा किसी में नहीं है।
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एक-दो नहीं पूरे 32 साल हो गए इस अस्पताल को खुले मगर यह सीएचसी, पीएचसी के फेर में घनचक्कर बना रहा। अस्पताल को आज तक महिला विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिल सकी है। तीन पदों के सामेक्ष यहां सिर्फ एक ही डॉक्टर तैनात है। 40 हजार की आबादी के दर्द की परवाह किसी को नहीं है। मरीजों को उपचार के लिए पिथौरागढ़ या हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ती है।
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एक दशक पूर्व तीन करोड़ की लागत से विकासखंड कार्यालय के पास सीएचसी का भवन बनाया गया। 2010 में कनालीछीना शरदोत्सव में आए तत्कालीन सीएम रमेश पोखरिया ने सीएचसी का लोकार्पण किया था। तब से कनालीछीना पीएचसी में सीएचसी का बोर्ड लगा दिया गया।
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पांच साल पहले पीएचसी को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। 2020 में यहां सीएचसी का बोर्ड हटाकर फिर से पीएचसी का बोर्ड लगा दिया गया। यानी बोर्ड लगाने हटाने तक ही काम सीमित रहे। डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पाई। इस समय यहां डॉ. प्रभारी चिकित्साधिकारी के पद पर रविशंकर श्रीवास्तव ही तैनात हैं। गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
तीन एपीएचसी और छह स्वास्थ्य केंद्र
कनालीछीना (पिथौरागढ़)। कनालीछीना पीएचसी के अंतर्गत अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्कोट, मुवानी, भागीचौरा और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तितरी, छड़नदेव, देवलथल, सिंघाली, आणागांव, ख्वांकोट आते हैं। यहां स्वास्थ्य सुविधाएं नाम मात्र की हैं। इन अस्पतालों से मरीजों को पहले कनालीछीना ही रेफर किया जाता है।
चिकित्साधिकारी का पक्ष
कनालीछीना पीएचसी में डॉक्टरों की तैनाती के लिए लगातार पत्राचार किया जाता है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास रहता है।
डॉ. रविशंकर श्रीवास्तव प्रभारी चिकित्साधिकारी।
प्रधान की पीड़ा
क्षेत्र की जनता के साथ बड़ा मजाक किया गया। पहले सीएचसी का बोर्ड लगाया गया फिर पीएचसी का बोर्ड लगा दिया गया। इतना धन खर्च करने के बाद भी एक्स-रे की कोई सुविधा नहीं है। हालांकि कुछ समय पहले रक्त समेत अन्य जांच शुरू हो गई हैं।

-प्रवीन सिंह, ग्राम प्रधान, ख्वांकोट।
अस्पताल में मामूली उपचार ही हो पाता है। ज्यादा गंभीर समस्या होने पर लोग पिथौरागढ़ ही जाना पसंद करते हैं। यहां डॉक्टर प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर ही रेफर करते हैं। ऐसे में कई मरीज पहले ही जिला अस्पताल चले जाते हैं।
-खुशाल दिगारी, सामाजिक कार्यकर्ता, कनालीछीना।

प्रवीन सिंह, ग्राम प्रधान।

प्रवीन सिंह, ग्राम प्रधान।- फोटो : PITHORAGARH

कनालीछीना पीएचसी।

कनालीछीना पीएचसी।- फोटो : PITHORAGARH

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