{"_id":"5929b2b64f1c1b7e4e5371c4","slug":"padmashri-lavraj-again-defeats-everest","type":"story","status":"publish","title_hn":"पद्मश्री लवराज ने फिर फतह किया एवरेस्ट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पद्मश्री लवराज ने फिर फतह किया एवरेस्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी/धारचूला
Updated Sat, 27 May 2017 10:39 PM IST
विज्ञापन
एवरेस्ट विजेता लवराज धर्मशक्तू
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीएसएफ में सहायक सेनानी एवं मुनस्यारी के बुंगा गांव निवासी पद्मश्री लवराज सिंह धर्मशक्तू के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने शनिवार को माउंट एवरेस्ट फतह करने में कामयाबी हासिल कर ली। शनिवार देर शाम मुनस्यारी और धारचूला समेत जिले के अन्य नगरों में इस उपलब्धि की जानकारी मिलते ही लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। लवराज छठी बार एवरेस्ट पर चढ़ने वाले देश के पहले पर्वतारोही बन गए हैं।
विज्ञापन
भारतीय पर्वतारोहण संस्थान और ओएनजीसी के इस एवरेस्ट अभियान दल को 27 मार्च को नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुनस्यारी के पंडित नैनसिंह पर्वतारोहण संस्थान में विशेष कार्याधिकारी के पद पर कार्यरत लवराज की पत्नी एवं प्रख्यात पर्वतारोही रीना कौशल धर्मशक्तू ने भारतीय पर्वतारोहण संस्थान से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि उपने पति लवराज एवं धारचूला निवासी ओएनजीसी के इंजीनियर योगेंद्र गर्ब्याल ने सुबह 6:10 बजे और उनके दो साथियों एन जोगोई, राहुल जरनगाल ने सुबह 7:45 बजे एवरेस्ट पर पहुंचे। जिला मुख्यालय में पर्वतारोही पुरमल सिंह धर्मशक्तू ने बताया कि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान ने इसकी पुष्टि की है। लवराज ने इससे पहले पहली बार 1998 में, दूसरी बार 2005 में, तीसरी बार 2009 में, चौथी बार 2012 में और पांचवीं बार 2013 में एवरेस्ट फतह की थी। मुनस्यारी के बुंगा गांव निवासी लवराज को 2003 में तेनजिंग नोरजे नेशनल एडवेंचर अवार्ड और 2014 में पद्मश्री सम्मान मिला। यहां मिली जानकारी में कहा गया है कि अभियान दल के सदस्यों को दो हिस्सों में बांटा गया था। चार सदस्यीय टीम संख्या एक का नेतृत्व पद्मश्री लवराज ने किया।
विज्ञापन
उधर, धारचूला के गर्ब्यांग गांव निवासी 33 वर्षीय योगेंद्र गर्ब्याल ने पहली बार एवरेस्ट फतह की है। ओएनजीसी दिल्ली में कार्यरत योगेंद्र उर्फ योगेश इससे पहले पायलट रह चुके हैं। योगेंद्र के पिता चंद्र सिंह गर्ब्याल का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था। घर पर मां दमयंती देवी रहती हैं। योगेंद्र की पत्नी रितु गर्ब्याल एसएसबी में डॉक्टर हैं। योगेंद्र ने शुक्रवार रात एवरेस्ट पर चढ़ने से पहले धारचूला में अपने कुछ मित्रों को वाट्सऐप से फोटो भी भेजी। पूरे धारचूला नगर में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन
लवराज ने पहले भी कई चोटियों को फतह किया
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। पर्वतारोही पद्मश्री लवराज सिंह धर्मशक्तू के खाते में शनिवार को बड़ी उपलब्धि जुड़ गई, लेकिन वह मुनस्यारी के जिस परिवेश में पैदा हुए थे, वहां पर से ही उनको पर्वतारोहण का शौक चढ़ा। उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से 1990 में पर्वतारोहण का कोर्स किया। उनके साथी बताते हैं कि लवराज को पहाड़ों पर चढ़ने का जुनून है। वह किसी भी अविजित चोटी तक पहुंचने का साहस रखते हैं। उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से कोर्स शुरू करने से पहले ही 1989 में 6861 मीटर ऊंची नंदादेवी चोटी पर चढ़ने में कामयाबी हासिल कर ली। 1997 में उन्होंने नंदा भनेर चोटी फतह की। 2008 में उन्होंने ब्रिटिश पर्वतारोही दल के साथ लायजन आफीसर का दायित्व निभाया। बीएसएफ में रहते हुए उन्होंने कंचनजंघा चोटी पर भी फतह हासिल की है। मुनस्यारी के बुंगा गांव निवासी लवराज ने दार्जिलिंग निवासी पर्वतारोही रीना कौशल धर्मशक्तू के साथ विवाह किया। रीना 29 दिसंबर 2009 को 900 किलोमीटर का सफर कर दक्षिणी ध्रुव की यात्रा कर पहली भारतीय महिला बन गई। रीना इस समय मुनस्यारी में पंडित नैनसिंह पर्वतारोहण संस्थान की विशेष कार्याधिकारी हैं। यह संस्थान पिछले साल खुला।