फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Mother is building Martyr Gate in memory of her son Bhuvan Chandra martyred in Operation Parakram Uttarakhand

Pithoragarh: बेटे की याद में मां बना रही शहीद द्वार, ऑपरेशन पराक्रम में देश के लिए शहीद हुआ पिथौरागढ़ का लाल

Sat, 15 Apr 2023 12:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sat, 15 Apr 2023 12:50 PM IST
सार

जब शासन-प्रशासन से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया तो उन्हाेंने अपने खर्च पर लाड़ले के नाम से शहीद द्वार बनाने की ठानी। इसके बाद पूर्व सैनिक संगठन ने भी वर्ष 2022 से प्रयास किए और शहीद के पैतृक गांव सुवाकोट मार्ग पर स्थान चिह्नित किया। लोक निर्माण विभाग से अनापत्ति मिली जिसके बाद कलावती देवी ने अपने खर्च से शहीद द्वार निर्माण का कार्य शुरू कराया।
 

विज्ञापन
Mother is building Martyr Gate in memory of her son Bhuvan Chandra martyred in Operation Parakram Uttarakhand
पिथौरागढ़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑपरेशन पराक्रम में शहीद हुए सिपाही भुवन चंद्र भट्ट के नाम से उनके पैतृक गांव सुवाकोट में शहीद द्वार का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ के सहयोग से वड्डा-सुवाकोट मार्ग पर शहीद द्वार का निर्माण भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुआ। शहीद की माता कलावती देवी अपने खर्च से प्रवेश द्वार का निर्माण करा रही हैं।

विज्ञापन


सुवाकोट निवासी भुवन चंद्र भट्ट फरवरी 1997 को सेना की कुमाऊं रेजीमेंट की 16वीं बटालियन में तैनात हुए। ऑपरेशन पराक्रम के दौरान वह लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) तंगधार सेक्टर जम्मू-कश्मीर में 15 जनवरी 2002 को 23 वर्ष की उम्र में देश के लिए शहीद हो गए थे।
विज्ञापन


कलावती ने अपने खर्च से शहीद द्वार निर्माण का कार्य शुरू कराया
भुवन की माता कलावती देवी ने इस शहीद द्वार के निर्माण के लिए 2017 से काफी संघर्ष किया। जब शासन-प्रशासन से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया तो उन्हाेंने अपने खर्च पर लाड़ले के नाम से शहीद द्वार बनाने की ठानी। इसके बाद पूर्व सैनिक संगठन ने भी वर्ष 2022 से प्रयास किए और शहीद के पैतृक गांव सुवाकोट मार्ग पर स्थान चिह्नित किया। जिलाधिकारी रीना जोशी के प्रयास से लोक निर्माण विभाग से अनापत्ति मिली जिसके बाद कलावती देवी ने अपने खर्च से शहीद द्वार निर्माण का कार्य शुरू कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस दौरान शहीद के भाई दीपक भट्ट, भाभी गीता भट्ट, पूर्व सैनिक संगठन के सूबेदार मेजर देव सिंह भाटिया, कै. दीवान सिंह, सेना मेडल सूबेदार मेजर भूपेंद्र बोरा, उमेश फुलेरा, आनंद सिंह, सुभाष भट्ट, दिवाकर सिंह, विक्रम सिंह आदि मौजूद थे।


ये भी पढ़ें...Uttarakhand Weather: पहाड़ से मैदान तक बढ़ने लगी तपिश, गर्मी से लोग परेशान, देहरादून में पारा 36 के पार पहुंचा

सरकार को करना चाहिए शहीद द्वार का निर्माण
पूर्व सैनिक संगठन ने कहा है कि एक ओर सरकार पूर्व सैनिकों और शहीदों के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करती है। दूसरी ओर वीरों की स्मृति में परिजनों को खुद के खर्च पर प्रवेश द्वार बनाना पड़ रहा है। संगठन के उपाध्यक्ष मयूख भट्ट ने कहा कि भुवन चंद्र भट्ट महज 23 वर्ष की उम्र में शहीद हो गए। उनके नाम से सरकार को प्रवेश द्वार का निर्माण कराना चाहिए। उन्होंने प्रवेश द्वार पर आने वाले खर्च की राशि शासन-प्रशासन से वहन करने की मांग की है। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed