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Pithoragarh News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा
Sat, 07 Sep 2024 11:18 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 07 Sep 2024 11:18 PM IST
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पिथौरागढ़। विशेष सत्र न्यायाधीश (पाक्सो) शंकर राज की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल के कठोर कारावास और 1.20 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को पांच वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय के नजदीक सिलौली निवासी शिक्षा विभाग में बाबू पद पर तैनात शमशेर बहादुर 2019 में नगर में किराए के मकान में रहता था। इस दौरान उसने घर में रहने वाली नाबालिग को अपने कमरे में बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता को धमकाते हुए उसने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। इससे वह गर्भवती हो गई। परिजनों को मामले का पता चलने के बाद उन्होंने आरोपी के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी। आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। तब से यह मामला न्यायालय में चल रहा था।
शनिवार को विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने सभी पक्षों, गवाहों को सुनने और साक्ष्यों का परिशीलन कर आरोपी को दोषी करार देते हुए धारा 376, 506 के तहत 20 वर्ष कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 506 के तहत सात वर्ष कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। उन्होंने जुर्माने की राशि से 1.10 लाख रुपये पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। मामले की पैरवी डीजीसी फौजदारी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।
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जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय के नजदीक सिलौली निवासी शिक्षा विभाग में बाबू पद पर तैनात शमशेर बहादुर 2019 में नगर में किराए के मकान में रहता था। इस दौरान उसने घर में रहने वाली नाबालिग को अपने कमरे में बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता को धमकाते हुए उसने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। इससे वह गर्भवती हो गई। परिजनों को मामले का पता चलने के बाद उन्होंने आरोपी के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी। आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। तब से यह मामला न्यायालय में चल रहा था।
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शनिवार को विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने सभी पक्षों, गवाहों को सुनने और साक्ष्यों का परिशीलन कर आरोपी को दोषी करार देते हुए धारा 376, 506 के तहत 20 वर्ष कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 506 के तहत सात वर्ष कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। उन्होंने जुर्माने की राशि से 1.10 लाख रुपये पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। मामले की पैरवी डीजीसी फौजदारी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।
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