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मानक आदर्श पर नहीं मिला दर्जा
केबी पाल /अमर उजाला, अस्कोट (पिथौरागढ़)।
Updated Thu, 11 Feb 2016 10:57 PM IST
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ग्राम पंचायत देवल में 124 वर्ष पहले स्थापित प्राथमिक विद्यालय अस्कोट को आदर्श विद्यालय के सभी मानक पूरे होने के बाद भी आदर्श विद्यालय का दर्जा नहीं मिल पाया है, जिससे लोगों में निराशा है।
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अस्कोट क्षेत्र के सबसे पुराने इस प्राथमिक विद्यालय की स्थापना वर्ष 1892 में हुई थी। यह विद्यालय तब क्षेत्र का एक मात्र प्राथमिक विद्यालय था। विद्यालय में पढ़ने के लिए दूर-दूर से बच्चे आते थे।
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उस समय यहां विद्यालयों की कमी होने के कारण छठी कक्षा में प्रवेश के लिए विद्यार्थी अल्मोड़ा जाते थे। यह विद्यालय मुख्य सड़क से 15 मीटर की दूरी पर स्थित है।
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विद्यालय के पास पर्याप्त मात्रा में जमीन उपलब्ध है। विद्यालय में मध्यान्ह भोजन, शौचालय, कक्षा कक्ष, विद्यार्थियों की संख्या, पढ़ाई व्यवस्था आदि आदर्श विद्यालय के सभी मानकों को पूरा करते हैं, लेकिन इस विद्यालय को विभाग की लापरवाही से आदर्श विद्यालय का दर्जा नहीं मिल पाया है।
रजवार भानुराज पाल का कहते हैं कि उन्होंने वर्ष 1955 में इसी विद्यालय से पढ़ाई की थी। विद्यालय के लिए ग्रामीणों ने भूमि दान की थी। विद्यालय को आदर्श विद्यालय का दर्जा देना चाहिए।
देवल के उप प्रधान कैलाश पाल का कहना है कि अस्कोट का प्राथमिक विद्यालय क्षेत्र का सबसे पुराना विद्यालय है। विद्यालय में सभी उचित व्यवस्थाएं हैं, इसके बावजूद आदर्श विद्यालय का दर्जा न देकर विद्यालय के साथ अन्याय किया जा रहा है।