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आपदा पीड़ितों की बस्ती में पानी नहीं

Sat, 18 Jun 2016 10:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला Updated Sat, 18 Jun 2016 10:46 PM IST
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No water in the township of disaster victims
पेयजल संकट - फोटो : अमर उजाला

आपदा के तीन वर्ष बीतने के बाद भी आपदा प्रभावितों के लिए बनाई गई बस्तियों में अब तक पीने के पानी का इंतजाम नहीं हो पाया। धारचूला तहसील के नगतड़ एवं बंगापानी तहसील के घट्टाबगड़ में आपदा प्रभावित पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। आपदा के बाद बिजली, पानी, पैदल मार्ग और सड़कों की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर आपदा प्रभावितों के लिए पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है।

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वर्ष 2013 की आपदा में सोबला एवं न्यू सुवा गांव बह गया था। इसी के साथ घट्टाबगड़ में भी आबादी क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ। धारचूला तहसील के 25 से अधिक आपदा प्रभावितों को नगतड़ में बसाया गया, वहीं बंगापानी तहसील के 43 से अधिक आपदा प्रभावितों को घट्टाबगड गांव की सीमा पर बसाया गया। दो वर्ष से यह मुख्यमंत्री की विधानसभा है। सीएम का क्षेत्र में होने के कारण यहां आपदा के बाद करोड़ों रुपये की राशि खर्च की गई।
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वहीं, भाजपा के पूर्व विधानसभा प्रभारी जगत मर्तोलिया ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सवाल किया कि करोड़ों रुपये कहां खर्च किए गए हैं। इस पर विधायक होने के नाते मुख्यमंत्री तत्काल श्वेतपत्र जारी करें।
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तीन वर्ष से नहीं मिला मुआवजा
धारचूला। वर्ष 2013 की आपदा में खुमती मोटर मार्ग को खोलने के लिए खुमती निवासी प्रेम सिंह बोरा ने पांच नाली जमीन बिना आपत्ति के ही लोक निर्माण विभाग को सड़क निर्माण के लिए दे दी, लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी भूमिधर को इसका मुआवजा नहीं मिल पाया है। वर्ष 2013 में खुमती मोटर मार्ग आपदा से क्षतिग्रस्त हो गया था।


मल्ला घोरपट्टा गांव में चार माह से पेयजल संकट
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मल्ला घोरपट्टा गांव को जाने वाली पेयजल लाइन नंदादेवी मार्ग पर नाली निर्माण के दौरान लगाई जेसीबी से टूट गई है, जिससे चार माह से गांव में गंभीर पेयजल संकट खड़ा हो गया है। शनिवार को गांव की महिलाएं एसडीएम और तहसीलदार को ज्ञापन देने के लिए पहुंचीं, लेकिन दोनों अधिकारी नामिक गए हैं। लोगों ने प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन देकर कहा कि नाली का निर्माण कर रहे ठेकेदार की गलती से यह समस्या पैदा हुई है। अब तक किसी ने भी टूटी लाइन की मरम्मत का प्रयास नहीं किया। महिलाओं ने कहा कि यदि रविवार तक पानी की सप्लाई सुचारु नहीं हुई तो धरना शुरू कर देंगे।

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