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जिले के अंतिम गांव नामिक में शुरू नहीं हो पाई बीबीएनएल की वाईफाई सेवा
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नाचनी (पिथौरागढ़)। जिले के अंतिम गांव नामिक में बीबीएनएल (भारत ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क लि.) की वाईफाई सेवा शुरू नहीं हो पाई है। इससे लोगों में नाराजगी है।
लोगों का कहना है कि कुछ समय पूर्व वाईफाई सेवा को शुरू करने के लिए इंजीनियर आए थे, लेकिन वह काम अधूरा छोड़कर चले गए हैं। लोगों ने शीघ्र सेवा को शुरू कर राहत दिलाने की मांग की है।
जिले के अंतिम गांव नामिक में 775 लोग रहते हैं। यह सभी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कुछ समय पूर्व बीबीएनएल की वाईफाई सेवा शुरू करने के लिए इंजीनियरों की टीम आई थी, लेकिन वह काम को आधा-अधूरा छोड़कर चली गई।
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वाईफाई सेवा के शुरू होने से लोगों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि वाईफाई सेवा शुरू न होने से बरसात में सूचनाओं के आदान-प्रदान में दिक्कत हो रही है।
इस गांव के लिए सड़क भी नहीं बन सकी है। ग्रामीणों को जिला मुख्यालय से गांव पहुंचने के लिए पिथौरागढ़ से बिर्थी तक 80 किमी लंबा सफर करना पड़ता है।
इसके बाद ग्रामीणों को द्वालीगाड़ बिर्थी से 28 किमी पैदल चलकर गांव पहुंचना पड़ता है। कपकोट के गोगिना गांव से भी दुर्गम रास्ता है। ग्राम प्रधान तुलसी देवी ने शीघ्र संचार सेवा शुरू कर गांव तक सड़क पहुंचाने की मांग की है।
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लोगों का कहना है कि कुछ समय पूर्व वाईफाई सेवा को शुरू करने के लिए इंजीनियर आए थे, लेकिन वह काम अधूरा छोड़कर चले गए हैं। लोगों ने शीघ्र सेवा को शुरू कर राहत दिलाने की मांग की है।
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जिले के अंतिम गांव नामिक में 775 लोग रहते हैं। यह सभी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कुछ समय पूर्व बीबीएनएल की वाईफाई सेवा शुरू करने के लिए इंजीनियरों की टीम आई थी, लेकिन वह काम को आधा-अधूरा छोड़कर चली गई।
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वाईफाई सेवा के शुरू होने से लोगों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि वाईफाई सेवा शुरू न होने से बरसात में सूचनाओं के आदान-प्रदान में दिक्कत हो रही है।
इस गांव के लिए सड़क भी नहीं बन सकी है। ग्रामीणों को जिला मुख्यालय से गांव पहुंचने के लिए पिथौरागढ़ से बिर्थी तक 80 किमी लंबा सफर करना पड़ता है।
इसके बाद ग्रामीणों को द्वालीगाड़ बिर्थी से 28 किमी पैदल चलकर गांव पहुंचना पड़ता है। कपकोट के गोगिना गांव से भी दुर्गम रास्ता है। ग्राम प्रधान तुलसी देवी ने शीघ्र संचार सेवा शुरू कर गांव तक सड़क पहुंचाने की मांग की है।