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स्वास्थ्य के लिए सेना और आईटीबीपी के भरोसे द्वितीय रक्षा पंक्ति

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 12:50 AM IST
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No Medical Facility in Indo-China Border
No Medical Facility in Indo-China Border
धारचूला (पिथौरागढ़)। चीन सीमा से सटे सीमांत धारचूला के दारमा और व्यास घाटियों में स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। दोनों घाटियों के 21 गांवों के लोगों को मामूली तकलीफ जुकाम-बुखार की दवा के लिए भी सेना या अर्द्धसैनिक बलों पर निर्भर रहते हैं।
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सीमा पर दुश्मन की किसी तरह की अवांछित गतिविधि हो या फिर युद्ध जैसे मौके पर सेना को मदद पहुंचानी हो सीमांत के लोगों ने हमेशा ही द्वितीय रक्षा पंक्ति की भूमिका निभाई है, लेकिन इस भूमिका के बावजूद सीमांत क्षेत्र आज भी उपेक्षित ही है। इसका उदाहरण धारचूला तहसील की दारमा और व्यास घाटियां हैं।
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दारमा घाटी में चौदह गांव दर, नांगलिंग, सेला, चल, बालिंग, दुग्तु, सोन, दांतु, बोन, फिलम, तिदांग, गो, मारछा, सीपू, व्यास घाटी में सात गांव बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नाभी, रोंगकांग, कुटी शामिल हैं। हिमालय से लगा होने से दारमा, व्यास घाटी में नवंबर से ही बर्फबारी शुरू हो जाती है। इस कारण दोनों घाटियों के लोग अपने गांवों में केवल छह माह के प्रवास पर ही जाते हैं। अप्रैल से लेकर अक्तूबर तक इन दोनों घाटियों में खूब चहल-पहल रहती है। इसके बावजूद इन गांवों में स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। दोनों घाटियों में एक अस्पताल तक नहीं खोला गया है।
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दारमा घाटी के दर गांव में आज से लगभग दो दशक पूर्व स्वास्थ्य उपकेंद्र खोला गया था जहां प्रवास के समय डॉक्टर, फार्मेसिस्ट भेजे जाते थे। इससे वहां पर लोगों को बुखार, पेटदर्द, खांसी, जुकाम के अलावा एक्सीडेंटल मामलों में प्राथमिक उपचार मिल जाता था, लेकिन वर्तमान में अब वहां कोई व्यवस्था नहीं है। कैलाश यात्रा के समय हर साल गुंजी में अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र खोला जाता है। कोरोना के कारण यात्रा बंद होने से दो साल से अस्पताल नहीं खुला है। ऐसे में दोनों घाटियों के लोग जुकाम बुखार से लेकर किसी तरह की घटना में चोटिल होने पर सेना या अर्द्ध सेना के अस्पतालों पर ही निर्भर रहते हैं।
चुनौती से कम नहीं
दोनों घाटियां सड़कों से जुड़ चुकी हैं लेकिन प्रकृति के रौद्र रूप के कारण बरसात में पुलों, सड़कों के बह जाने से यातायात महीनों तक ठप रहता है। ऐसे में प्रवास पर जाने वाली गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराना भी किसी चुुनौती से कम नहीं होता है। ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष पूरन ग्वाल, दुग्तू के प्रधान वीरेंद्र दुग्ताल, दांतू के प्रधान जमन सिंह दताल ने दोनों घाटियों में प्रवास के समय अस्पताल खोलने के साथ ही पूरा स्टाफ तैनात करने की मांग की है।

गुंजी में स्वास्थ्य विभाग अस्पताल भवन का निर्माण कर रहा है। इस अस्पताल में डॉक्टर, एएनएम, फार्मेसिस्ट तैनात रहेंगे। इस अस्पताल का संचालन प्रवास के समय होगा। इस अस्पताल के बनने से प्रवास पर जाने वाले लोगों को उपचार की सुविधा मिल सकेगी। दारमा घाटी के दुग्तू में अस्पताल भवन के लिए जगह तलाशी जा रही है। - डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।
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