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सुस्त गति से चल रहा है सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण टनकपुर- जौलजीबी सड़क का निर्माण
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नकपुर जौलजीवी सड़क पर आया मलबा।
- फोटो : PITHORAGARH
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण टनकपुर-जौलजीबी सड़क पर सुस्त गति से काम चल रहा है। तालेश्वर से जौलजीबी की ओर आए मलबे को एक माह बाद भी नहीं हटाया गया है।
कुछ महीने पहले सड़क कटान का काम पूरा होेने के बाद बड़े वाहनों की आवाजाही शुरू हुई थी। सीमा से लगे तीन दर्जन गांवों के लोगों को आस थी कि जल्द ही सड़क पर डामरीकरण शुरू हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
महाकाली के किनारे सीधी और कठोर चट्टानों को काटकर बन रही सड़क के बनने के बाद भी इस पर सफर करना आसान नहीं होगा। सड़क के किनारे की चट्टानों को बेतरतीब तरीके से काटा गया है।
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नीचे की ओर लटकी हुई चट्टानें कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। तालेश्वर के पास पुल का काम अभी भी शुरू नहीं हुआ है। वहां से 300 मीटर आगे तालेश्वर मंदिर के ठीक ऊपर सड़क पर रुक-रुक कर मलबा गिर रहा है।
कुछ दूरी पर एक बड़ा बोल्डर आया है। उसे हटाने के लिए ठेकेदार ने पोकलैंड मशीन तो भेज रखी है लेकिन वहां पर भी काम होता नहीं दिखा। झूलाघाट से तालेश्वर के बीच भी कई जगह खनन सामग्री सड़क के किनारे पड़ी है। रेत से लदे वाहनों के चलने से सड़क में गड्ढे हो गए हैं।
मानसरोवर यात्रा का वैकल्पिक मार्ग बन सकती है सड़क
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। लोनिवि की अस्कोट डिविजन सड़क निर्माण कर रही है। सड़क बनने से बरसात में इसे मानसरोवर यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग के तौर पर भी प्रयोग किया जा सकता है।
वहीं भारतीय सीमा के ठीक सामने नेपाल ने बैतड़ी से दार्चुला को जोड़ने के लिए सड़क का निर्माण कर दिया है। चमेलिया से दार्चुला के लिए 45 किमी सड़क पर कटिंग का काम चल रहा है। सड़क बनने से वहां के मकन्ना, लाली और रतोड़ा सहित एक दर्जन गांवों को फायदा मिलेगा।
जौलजीबी सड़क में कटिंग का काम खर्कतड़ी तक पूरा हो चुका है। दीवारें, पुलिया, चौड़ीकरण और मलबा हटाने का काम चल रहा है। छह मीटर चौड़ी बनने वाली सड़क पर तालेश्वर पर आए बोल्डर को हटाने के लिए मशीनें भेजी गई हैं।
- राम सिंह भंडारी, एई, लोनिवि अस्कोट।
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कुछ महीने पहले सड़क कटान का काम पूरा होेने के बाद बड़े वाहनों की आवाजाही शुरू हुई थी। सीमा से लगे तीन दर्जन गांवों के लोगों को आस थी कि जल्द ही सड़क पर डामरीकरण शुरू हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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महाकाली के किनारे सीधी और कठोर चट्टानों को काटकर बन रही सड़क के बनने के बाद भी इस पर सफर करना आसान नहीं होगा। सड़क के किनारे की चट्टानों को बेतरतीब तरीके से काटा गया है।
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नीचे की ओर लटकी हुई चट्टानें कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। तालेश्वर के पास पुल का काम अभी भी शुरू नहीं हुआ है। वहां से 300 मीटर आगे तालेश्वर मंदिर के ठीक ऊपर सड़क पर रुक-रुक कर मलबा गिर रहा है।
कुछ दूरी पर एक बड़ा बोल्डर आया है। उसे हटाने के लिए ठेकेदार ने पोकलैंड मशीन तो भेज रखी है लेकिन वहां पर भी काम होता नहीं दिखा। झूलाघाट से तालेश्वर के बीच भी कई जगह खनन सामग्री सड़क के किनारे पड़ी है। रेत से लदे वाहनों के चलने से सड़क में गड्ढे हो गए हैं।
मानसरोवर यात्रा का वैकल्पिक मार्ग बन सकती है सड़क
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। लोनिवि की अस्कोट डिविजन सड़क निर्माण कर रही है। सड़क बनने से बरसात में इसे मानसरोवर यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग के तौर पर भी प्रयोग किया जा सकता है।
वहीं भारतीय सीमा के ठीक सामने नेपाल ने बैतड़ी से दार्चुला को जोड़ने के लिए सड़क का निर्माण कर दिया है। चमेलिया से दार्चुला के लिए 45 किमी सड़क पर कटिंग का काम चल रहा है। सड़क बनने से वहां के मकन्ना, लाली और रतोड़ा सहित एक दर्जन गांवों को फायदा मिलेगा।
जौलजीबी सड़क में कटिंग का काम खर्कतड़ी तक पूरा हो चुका है। दीवारें, पुलिया, चौड़ीकरण और मलबा हटाने का काम चल रहा है। छह मीटर चौड़ी बनने वाली सड़क पर तालेश्वर पर आए बोल्डर को हटाने के लिए मशीनें भेजी गई हैं।
- राम सिंह भंडारी, एई, लोनिवि अस्कोट।

भारतीय सीमा पर नजर रखने के लिए नेपाल में बन रही सड़क।- फोटो : PITHORAGARH