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Pithoragarh News: पलायन रोकने के लिए परंपरागत कृषि की ओर लौटने की जरूरत
Thu, 05 Sep 2024 12:17 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 05 Sep 2024 12:17 AM IST
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पिथौरागढ़। पूर्व मंत्री और डीडीहाट के विधायक बिशन सिंह चुफाल की पहल पर पिथौरागढ़ में ग्राम सुराज चिंतन बैठक हुई। इसमें पर्यावरणीय परिवर्तन, जलवायु, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, पलायन, ग्रामीण कृषि, रोजगार, वन्य जीव संघर्ष, नशापान, स्वास्थ्य की चुनौती, लोक और सामरिक महत्व पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि पहाड़ से पलायन रोकने के लिए लोगों को कृषि, बागवानी, पशुधन और परंपरागत मोटा अनाज उत्पादन की ओर लौटना होगा।
चिंतन बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकारों की होम स्टे, मत्स्य, पशुपालन, डेयरी आदि योजनाएं पलायन रोकने में कारगर हुई हैं। कहा कि पहाड़ का अस्तित्व बचाने के लिए खेतों को बंजर होने से बचाना होगा। विशेषज्ञों ने लुप्त हो रही लोक परंपराओं को संरक्षित करने की आवश्यकता भी बताई। कहा कि पहाड़ में वाद्ययंत्रों, जागर, शगुन आखर, फाग के कलाकारों की संख्या में कमी आ रही है। ऐसे हुनरमंदों के लिए नीति बनाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों ने पहाड़ी क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा, राजस्व, पंचायतीराज को ब्लाक स्तर का काडर बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे पलायन रुकेगा और रोजगार का सृजन होगा। विधायक चुफाल ने कहा कि प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों से 1700 गांव खाली हो गए हैं। पहाड़ी जिलों में लोग परंपरागत कृषि की ओर लौटें इन्हीं संभावनाओं को लेकर उनकी ओर से यह पहल की जा रही है। डॉ.ज्ञान प्रकाश कच्चाहारी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संचालन ललित शौर्य ने किया। कार्यक्रम में महिला समूहों की संचालिकाएं भी मौजूद रहीं। समारोह में भटिया, लाल चावल का भात, गाबे की सब्जी सहित अन्य पहाड़ी व्यंजन परोसे गए।
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चिंतन बैठक में इन्होंने रखे विचार:
प्रो.चंद्र दत्त सूंठा, डॉ. अशोक कुमार पंत, प्रो. नरेंद्र भंडारी, प्रो. डीएस पांगती, श्याम चंद, चारु जोशी, नारायण सिंह मेहरा, संजय महर, राजेंद्र चंद, कै. कुंवर राम कोहली, विशाल चंद, डॉ. पीसी पंत, डॉ. उमा पाठक, कोमल मेहता।
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चिंतन बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकारों की होम स्टे, मत्स्य, पशुपालन, डेयरी आदि योजनाएं पलायन रोकने में कारगर हुई हैं। कहा कि पहाड़ का अस्तित्व बचाने के लिए खेतों को बंजर होने से बचाना होगा। विशेषज्ञों ने लुप्त हो रही लोक परंपराओं को संरक्षित करने की आवश्यकता भी बताई। कहा कि पहाड़ में वाद्ययंत्रों, जागर, शगुन आखर, फाग के कलाकारों की संख्या में कमी आ रही है। ऐसे हुनरमंदों के लिए नीति बनाने की जरूरत है।
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विशेषज्ञों ने पहाड़ी क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा, राजस्व, पंचायतीराज को ब्लाक स्तर का काडर बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे पलायन रुकेगा और रोजगार का सृजन होगा। विधायक चुफाल ने कहा कि प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों से 1700 गांव खाली हो गए हैं। पहाड़ी जिलों में लोग परंपरागत कृषि की ओर लौटें इन्हीं संभावनाओं को लेकर उनकी ओर से यह पहल की जा रही है। डॉ.ज्ञान प्रकाश कच्चाहारी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संचालन ललित शौर्य ने किया। कार्यक्रम में महिला समूहों की संचालिकाएं भी मौजूद रहीं। समारोह में भटिया, लाल चावल का भात, गाबे की सब्जी सहित अन्य पहाड़ी व्यंजन परोसे गए।
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चिंतन बैठक में इन्होंने रखे विचार:
प्रो.चंद्र दत्त सूंठा, डॉ. अशोक कुमार पंत, प्रो. नरेंद्र भंडारी, प्रो. डीएस पांगती, श्याम चंद, चारु जोशी, नारायण सिंह मेहरा, संजय महर, राजेंद्र चंद, कै. कुंवर राम कोहली, विशाल चंद, डॉ. पीसी पंत, डॉ. उमा पाठक, कोमल मेहता।