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पीड़ित पक्ष और स्टाफ में नोकझोंक
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Thu, 15 Feb 2018 10:36 PM IST
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प्रसूता और नवजात की मौत के मामले में जानकारी लेते जांच दल के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
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महिला अस्पताल में प्रसूता और नवजात की मौत के दो अलग-अलग मामलों में महानिदेशालय स्तर की जांच शुरू हो गई है। इस मामले में गठित दो सदस्यीय जांच दल पीड़ित पक्ष के साथ ही आरोपी चिकित्सक, स्टाफ के बयान दर्ज करने में जुट गया है। इसके साथ ही टीम ने अस्पताल के चिकित्सीय अभिलेख भी तलब कर लिए हैं। इस दौरान जांच दल के सामने कई बार पीड़ित पक्ष और स्टाफ के बीच नोकझोंक भी हुई।
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बृहस्पतिवार को जांच दल में शामिल अल्मोड़ा जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रकाश वर्मा और पिथौरागढ़ की प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उषा गुंजियाल महिला अस्पताल पहुंचीं। इससे पहले शिकायतकर्ताओं को अस्पताल बुलाया गया था। जांच टीम ने सीएमएस के कक्ष में पीड़ित पक्ष, आरोपी चिकित्सकों और स्टाफ के बयान दर्ज किए। साथ ही दोनों पक्षों से कई बिंदुओं पर सवाल भी पूछे। जांच दल ने अस्पताल के रोगी पंजीयन से लेकर कई चिकित्सीय अभिलेखों की भी जांच-पड़ताल की।
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जांच-पड़ताल और बयान लेते समय पीड़ित पक्ष ने आरोपी चिकित्सक, स्टाफ पर लापरवाही का आरोप दोहराया। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक हुई। एक बार तो नाराज कुछ परिजन आरोपी चिकित्सक, स्टाफ से भिड़ने पर आमादा हो गए। आसपास मौजूद अन्य परिजनों ने मामला शांत कराया। जांच दल के सदस्य डॉ.वर्मा ने बताया कि जांच-पड़ताल शुक्रवार को भी जारी रहेगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट कुमाऊं स्वास्थ्य निदेशक को सौंप दी जाएगी।
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केस 1
सेरा गांव निवासी ममता 27 पत्नी रोहित मेहता को पहली बार प्रसव पीड़ा होने पर 23 अक्तूबर 2017 की सुबह महिला अस्पताल भर्ती कराया गया था। रात 8 बजे प्रसूता ने एक बेटी को जन्म दिया। इस बीच प्रसूता और नवजात की हालत बिगड़ गई। महिला तो बच गई, लेकिन 24 अक्तूबर की शाम इलाज के दौरान नवजात ने हल्द्वानी के सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस केस में चिकित्सक, स्टाफ पर प्रसव में लापरवाही के साथ ही प्रसूता से मारपीट और तीमारदारों से अभद्रता का आरोप है। पीड़ित पक्ष ने चिकित्सक, स्टाफ को प्रसूता की हालत बिगड़ने और नवजात की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। बता दें कि अस्पताल ने नवजात को पैदा होते ही मृत घोषित कर दिया था, लेकिन नवजात की मौत 22 घंटे बाद हल्द्वानी में इलाज के दौरान हुई।
केस 2
कुमौड़ निवासी दीपा 25 पत्नी दीपक महर को पहली बार प्रसव पीड़ा होने पर 12 अप्रैल 2017 की रात 8 बजे महिला अस्पताल भर्ती कराया गया था। जांच के बाद चिकित्सक, स्टाफ ने नार्मल डिलीवरी का भरोसा दिलाया। अगले दिन प्रसव पीड़ा तेज होने पर महिला को लेबर रूम में ले जाया गया। दो घंटे बाद चिकित्सक, स्टाफ ने नार्मल डिलीवरी से हाथ खड़े कर दिए और सीजेरियन जरूरी बताया। परिजनों की रजामंदी के बाद रात 12 बजे प्रसूता का ऑपरेशन हुआ। इस दौरान नवजात बेटे की मौत हो गई। पीड़ित पक्ष ने चिकित्सक, स्टाफ पर प्रसव में लापरवाही के साथ ही अभद्रता का आरोप लगाया है। आरोप है कि स्टाफ ने शुरू से ही इलाज में लापरवाही बरती, इसके चलते सीजेरियन की नौबत आई और नवजात की मौत हो गई।
दो और मामलों के पीड़ितों की गवाही भी होगी
पिथौरागढ़। महानिदेशालय स्तर पर गठित जांच दल दो और मामलों के पीड़ितों के बयानों को बतौर गवाही जांच में शामिल करेगा। इन मामलों में भी अस्पताल चिकित्सक, स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का आरोप है। हालांकि पीड़ित पक्ष ने अब तक महानिदेशालय से शिकायत नहीं की है। अलबत्ता प्रशासन से मामले की शिकायत की जा चुकी है। पहला मामला गुरना निवासी फौजी अनिल सिंह की पत्नी वंदना और दूसरा मामला दशौली निवासी सुलोचना 30 पत्नी प्रमोद कुमार से जुड़ा है।