मुनस्यारी में पारा माइनस 0.2 डिग्री पहुंचा
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जिला मुख्यालय में रविवार शाम हुई बारिश और ऊंची चोटियों पर हिमपात के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार सुबह यहां का न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस रहा। यह इस मौसम का सबसे कम तापमान है। पिछले साल 25 दिसंबर को पिथौरागढ़ नगर का तापमान माइनस 0.2 डिग्री रहा था। उधर, मुनस्यारी के आसपास के इलाकों में हिमपात के कारण सोमवार सुबह मुनस्यारी का न्यूनतम तापमान माइनस 0.2 डिग्री रिकार्ड किया गया। तापमान में गिरावट से अब पाला गिरने की संभावना बढ़ने लगी है। सोमवार को यहां मौसम एकदम साफ रहा। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले दो-चार दिन तक मौसम सामान्य बना रहेगा। अलबत्ता हल्के और मध्यम स्तर के बादलों की आवाजाही बनी रहेगी।
घाटी वाले इलाकों में सोमवार को कोहरे का जबर्दस्त प्रकोप रहा। थल, मुवानी, नाचनी, जौलजीबी, घाट, पनार में सुबह 11 बजे तक कोहरे के कारण वाहनों के संचालन में भारी दिक्कत आई। अस्कोट तक भी कोहरे का असर दिखाई दिया। मुनस्यारी में आसपास के इलाकों में गिरी बर्फ धीरे-धीरे पिघलने लगी है। अलबत्ता बेटुलीधार, खलियाटाप में अभी बर्फ की मोटी चादर बिछी हुई है। इन इलाकों की बर्फ देर तक नहीं पिघल पाती।
कहां कितनी बारिश
डीडीहाट में 25 मिलीमीटर
पिथौरागढ़ में 6.1 एमएम
मुनस्यारी में 7 एमएम
गंगोलीहाट में 1.5 एमएम
धारचूला में 2.2 एमएम
बेड़ीनाग में मात्र .2 एमएम
(आंकड़े आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार)
प्राकृतिक स्रोतों पर बारिश का कोई असर नहीं
पिथौरागढ़। जिले में लंबे समय बाद सामान्य स्तर की ही बारिश हुई। इतनी कम बारिश से प्राकृतिक जलस्रोतों का असर बढ़ने की संभावना नहीं रहती। मौसम विभाग का कहना है कि लंबे समय बाद कम मात्रा में हुई बारिश अभी जमीन की नमी को ही पर्याप्त नहीं कर पाई है। वैसे भी शीतकाल में वर्षा की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है और इसका असर प्राकृतिक स्रोतों पर नहीं पड़ता। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके वर्मा ने बताया कि मानसून सीजन में जब बारिश की मात्रा 100 मिलीमीटर से अधिक हो जाए तभी स्रोतों में पानी बढ़ने लगता है। मानसून सीजन में एक खास बात यह होती है कि अमूमन रोज बारिश होती रहती है। इससे नमी बढ़ती है और स्रोतों को जीवनदान मिलने लगता है। जिले के कई इलाके ऐसे हैं जहां पर बारिश की मात्रा इस बार बेहद न्यून रही।