पिथौरागढ़। राज्य सरकार ने वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट के तहत मुनस्यारी के राजमा को प्रस्तावित किया है। मड़वे के उत्पादन और विपणन योग्य उत्पाद की मात्रा को देखते हुए राजमा के साथ ही मड़ुवे का भी कृषक उत्पाद संगठन (एफपीओ) गठित किया जाएगा। यह बात कृषि अवसंरचना वित्तीय सुविधा के संचालन को लेकर डीएम डॉ. विजय कुमार जोगदंडे की अध्यक्षता में हुई निगरानी समिति की बैठक में कही गई।
बैठक में नाबार्ड के जिला प्रबंधक ने एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये का कृषि अवसंरचना निधि घोषित की है, जिसमें उत्तराखंड के लिए 785 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। निधि के तहत कृषि उत्पादकों के भंडारण एवं प्रसंस्करण के लिए आवश्यक अवसंरचना बनाने के लिए लिए जाने वाले ऋण में तीन प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी देने का प्रावधान है। दो करोड़ रुपये तक के ऋण पर सात साल की अवधि तक ब्याज सब्सिडी देय होगी। प्राथमिक समितियां, एफपीओ स्वयं सहायता समूह बहुउद्देशीय सहकारिता समितियां, एग्रीस्टार्टअप आदि इस ऋण को ले सकते हैं। प्रत्येक विकासखंड में एक-एक प्राथमिक सहकारी समिति का चयन कर ऋण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बैठक में सीडीओ डॉ. सौरभ गहरवार, डीडीएम नाबार्ड अमित पांडेय, मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी, डिप्टी सीवीओ डॉ. पंकज जोशी, एआर कोऑपरेटिव मनोज पुनेठा, वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक आईएलएसपी कुलदीप बिष्ट, लीड बैंक प्रबंधक अमर सिंह ग्वाल मौजूद रहे।