{"_id":"5c97cc37bdec2214577e7655","slug":"mps-are-so-far-away-candidates-are-also-scared","type":"story","status":"publish","title_hn":"सांसद तो दूर, प्रत्याशियों को भी डराती है नामिक की चढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांसद तो दूर, प्रत्याशियों को भी डराती है नामिक की चढ़ाई
Sun, 24 Mar 2019 11:58 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Sun, 24 Mar 2019 11:58 PM IST
विज्ञापन
हिमालय की तलहटी में 2700 मीटर की ऊंचाई पर बसा नामिक गांव।
- फोटो : AMAR UJALA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
1952 से अब तक 124 परिवार और 407 मतदाताओं वाले नामिक गांव में सांसद तो दूर वोट मांगने के लिए कोई प्रत्याशी भी नहीं पहुंचा। नामिक पहुंचने के लिए काफी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। यहीं कारण है कि नेता यहां आने से परहेज ही करते हैं। जब नेता गांव तक पहुंचते ही नहीं तो वहां का विकास कैसे कराएंगे, यह अपने आप में बड़ा प्रश्न है।
समुद्र तल से करीब 2700 मीटर की ऊंचाई में नामिक और हीरामणि ग्लेशियर की तलहटी में बसे नामिक गांव में 206 पुरुष और 201 महिला मतदाता हैं। नामिक के लोग घोर अभावों में जीवन गुजार रहे हैं। नामिक जाने के लिए जिले के बिर्थी से 27 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। 27 में से 18 किमी खड़ी चढ़ाई और नौ किमी की तीव्र ढलान है। बिर्थी से दूरी अधिक होने के कारण नामिक के लोग अधिकतर बागेश्वर जिले के गोगिना से आवागमन करते हैं। गोगिना से नामिक की दूरी सात किमी है लेकिन यह मार्ग भी खड़ी चढ़ाई वाला है। यही कारण है कि नामिक जाने से नेता भी कतराते हैं। नामिक में अब तक सांसद का कोई प्रत्याशी तक वोट मांगने नहीं पहुंचा। जीतने के बाद किसी सांसद के दीदार गांव के लोगों ने नहीं किए।
2014 में नामिकवासियों ने देखा मुख्यमंत्री
2014 में नामिक के लोगों ने मुख्यमंत्री को देखा। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक हरीश धामी के साथ हेलीकॉप्टर से नामिक पहुंचे थे। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नामिक के लिए होकरा के पास से 17 किमी सड़क मंजूर हुई। निर्माण कार्य बहुत ही धीमी गति से चल रहा है। राज्य बनने के बाद डीडीहाट के विधायक विशन सिंह चुफाल ने नामिक का दौरा किया था।
विज्ञापन
मतदान को लेकर संशय में नामिक के लोग
पिथौरागढ़। वर्ष 2007-08 में गोगिना (बागेश्वर) के पास रामगंगा नदी में 1.67 करोड़ की लागत से बना झूलापुर 2018 की बरसात में खतरे की जद में आ गया था। अगस्त, सितंबर में हुई तेज बारिश से पुल की नींव से पत्थर निकल गए हैं, नींव खोखली हो गई है। ग्राम प्रधान तुलसी जैम्याल कहती हैं कि पुल की मरम्मत का मामला लगातार प्रशासन और विभाग के सामने उठाया जा रहा है लेकिन पुल की मरम्मत नहीं की गई। कहती हैं कि पुल गिरा तो गांव के लोगों के पास 27 किमी लंबे बिर्थी मार्ग का ही विकल्प बचेगा। इस समय बिर्थी वाले मार्ग पर 4 से 6 फीट बर्फ जमा है। कहती हैं कि गांव के लोग इस मुद्दे पर लोकसभा चुनाव में मतदान करने, न करने पर विचार कर रहे हैं। 2012 में सड़क, स्वास्थ्य, संचार आदि मुद्दों को लेकर ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार किया था।
विज्ञापन
समुद्र तल से करीब 2700 मीटर की ऊंचाई में नामिक और हीरामणि ग्लेशियर की तलहटी में बसे नामिक गांव में 206 पुरुष और 201 महिला मतदाता हैं। नामिक के लोग घोर अभावों में जीवन गुजार रहे हैं। नामिक जाने के लिए जिले के बिर्थी से 27 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। 27 में से 18 किमी खड़ी चढ़ाई और नौ किमी की तीव्र ढलान है। बिर्थी से दूरी अधिक होने के कारण नामिक के लोग अधिकतर बागेश्वर जिले के गोगिना से आवागमन करते हैं। गोगिना से नामिक की दूरी सात किमी है लेकिन यह मार्ग भी खड़ी चढ़ाई वाला है। यही कारण है कि नामिक जाने से नेता भी कतराते हैं। नामिक में अब तक सांसद का कोई प्रत्याशी तक वोट मांगने नहीं पहुंचा। जीतने के बाद किसी सांसद के दीदार गांव के लोगों ने नहीं किए।
विज्ञापन
2014 में नामिकवासियों ने देखा मुख्यमंत्री
2014 में नामिक के लोगों ने मुख्यमंत्री को देखा। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक हरीश धामी के साथ हेलीकॉप्टर से नामिक पहुंचे थे। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नामिक के लिए होकरा के पास से 17 किमी सड़क मंजूर हुई। निर्माण कार्य बहुत ही धीमी गति से चल रहा है। राज्य बनने के बाद डीडीहाट के विधायक विशन सिंह चुफाल ने नामिक का दौरा किया था।
विज्ञापन
मतदान को लेकर संशय में नामिक के लोग
पिथौरागढ़। वर्ष 2007-08 में गोगिना (बागेश्वर) के पास रामगंगा नदी में 1.67 करोड़ की लागत से बना झूलापुर 2018 की बरसात में खतरे की जद में आ गया था। अगस्त, सितंबर में हुई तेज बारिश से पुल की नींव से पत्थर निकल गए हैं, नींव खोखली हो गई है। ग्राम प्रधान तुलसी जैम्याल कहती हैं कि पुल की मरम्मत का मामला लगातार प्रशासन और विभाग के सामने उठाया जा रहा है लेकिन पुल की मरम्मत नहीं की गई। कहती हैं कि पुल गिरा तो गांव के लोगों के पास 27 किमी लंबे बिर्थी मार्ग का ही विकल्प बचेगा। इस समय बिर्थी वाले मार्ग पर 4 से 6 फीट बर्फ जमा है। कहती हैं कि गांव के लोग इस मुद्दे पर लोकसभा चुनाव में मतदान करने, न करने पर विचार कर रहे हैं। 2012 में सड़क, स्वास्थ्य, संचार आदि मुद्दों को लेकर ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार किया था।