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आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर खेती करने वाले पूर्व प्रधान मोहन जोशी बनेंगे प्रवासियों के लिए आदर्श
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गणाई के शेरा गांव में पॉवर ट्रिलर से खेत जोतते पूर्व प्रधान मोहन जोशी।
- फोटो : AMAR UJALA
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कुंदन मेहता (संवाद) गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। कोरोना महामारी के कारण रोजगार छूटने से हजारों की संख्या में बेरोजगार गांवों में पहुंच रहे हैं। अभी क्वारंटीन केंद्रों में रह रहे इन युवाओं के सामने रोजगार की बड़ी समस्या खड़ी है। रोजगार के संकट से जूझ रहे ऐसे ही युवाओं को पूर्व प्रधान मोहन चंद्र जोशी कृषि तकनीक की जानकारी देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करेंगे।
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रोजगार के लिए एक ओर जहां सैकड़ों युवा शहरों की ओर गए वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने स्थानीय स्तर पर ही कृषि और पशुपालन से आजीविका चलाई। इन्हीं में बडौली गांव के पूर्व प्रधान मोहन चंद्र जोशी भी शामिल हैं। एमए बीएड पास मोहन चंद्र जोशी पहले और युवाओं की तरह नौकरी के लिए प्रयास करते रहे, जब सरकारी नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने शहरों में जाकर दर-दूर की ठोकरें खाने के बजाय पहाड़ में ही कृषि और बागवानी के क्षेत्र में काम कर आत्मनिर्भर बनने की ठानी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने इस क्षेत्र में अच्छी आय के लिए परंपरागत तकनीक के बजाय आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक को प्राथमिकता दी है। मोहन चंद्र खेती के लिए पॉवर थ्रिलर से लेकर उन्नत बीजों का इस्तेमाल करते हैं। पूर्व में ग्राम प्रधान रह चुके मोहन जोशी का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण अपने गांवों में आए युवाओं के पास रोजगार का संकट है, लेकिन उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। वह कहते हैं कि पहाड़ में कृषि, सब्जी उत्पादन, बागवानी, डेयरी सहित तमाम विकल्प मौजूद हैं। यदि युवा चाहें तो इसे रोजगार का जरिया बना सकते हैं। उनका कहना है कि दशकों बाद भी जो लोग पहाड़ लौटे हैं और कृषि बागवानी की जानकारी नहीं रखते हों और स्वरोजगार करना चाहते हैं वह उन्हें अपनी ओर से पूरा सहयोग और जानकारी देंगे। मोहन जोशी ने इसके लिए बाकायदा अभियान चलाकर युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की बात कही है।
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