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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Marking of Indo-Nepal Border by Kali River

काली नदी से हो रहे भूकटाव के कारण बदल रहा है भारत और नेपाल का भूगोल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 12:06 AM IST
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Marking of Indo-Nepal Border by Kali River
भारत और नेपाल के बीच सीमा का निर्धारण करने वाली काली नदी। - फोटो : PITHORAGARH
दीपक कापड़ी
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पिथौरागढ़। कालापानी से निकलने वाली काली नदी के प्रचंड वेग से भारत ही नहीं नेपाल का भूगोल भी बदल रहा है। पिछले कई वर्षों में भू-कटाव के कारण भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच सैकड़ों एकड़ जमीन नदी में समा गई है। हालांकि नेपाल क्षेत्र में खनन न होने और मजबूत तटबंध होने से वहां नदी कम भूकटाव कर रही है, जबकि भारत के हालात इसके ठीक उलट हैं।
काली नदी भारत और नेपाल के बीच सीमा का निर्धारण करती है। नदी किनारे रहने वाले लोग बताते हैं कि लगातार हो रहे खनन के कारण काली नदी भारतीय क्षेत्रों की ओर गहरी होती जा रही है। इस कारण भू-कटाव की घटनाएं बढ़ी हैं। इससे नदी के मध्य भाग में टापू बन गए हैं।
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नदी के प्रचंड वेग के कारण पिछले कई सालों में उनके उपजाऊ खेत बह गए हैं। उनका कहना है कि नदी में खनन नहीं रोका गया और जल्द मजबूत तटबंधों का निर्माण नहीं किया गया तो भविष्य में नदी आबादी वाले क्षेत्रों का रुख कर भयंकर तबाही मचा सकती है।
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बरसात में हर साल सैकड़ों नाली जमीन लील लेती है काली
पिथौरागढ़। बरसात मेें काली का प्रचंड वेग में भूमि को काटकर अपने साथ ले जाता है। नदी के किनारे भारत और नेपाल की लाखों की आबादी रहती है। भारत के धारचूला, जौलजीबी, झूलाघाट, पंचेश्वर, टनकपुर, बनबसा आदि शहर नदी किनारे बसे हैं। काली नदी इन शहरों के अलावा छोटे-बड़े गांवों की सैकड़ों नाली भूमि का कटान कर रही है।

मजबूत तटबंधों का निर्माण न होने से काली कटाव करती जा रही है। भारत को भी नेपाल की तरह कटाव को रोकने के लिए मजबूत तटबंधों का निर्माण करना चाहिए।
- मदन मोहन भट्ट, पूर्व जिला पंचायत सदस्य।
काली नदी के वेग से हो रहा भूकटाव खतरे की घंटी है। वर्ष 2013 में हमारी टीम ने क्षेत्र का सर्वे कर भूकटाव पाया। भारतीय तटबंधों की घटिया गुणवत्ता भी इसका कारण है। इसे रोकने के लिए नेपाल की तरह मजबूत तटबंध बनाने की संस्तुति की गई थी।
-त्रिभुवन सिंह पांगती, सेवानिवृत्त महानिदेशक, जीएसआई देहरादून।
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