{"_id":"5e63de678ebc3eeb707c2d05","slug":"mallika-virdi-pithoragarh-news-hld3765541166","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं को सशक्त करने में जुटी हैं मल्लिका विर्दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं को सशक्त करने में जुटी हैं मल्लिका विर्दी
विज्ञापन
मुनस्यारी में वनों के प्रति चेतना जगाती मल्लिका विर्दी। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। वर्ष 1192 में पर्यावरण संस्था के जरिये मुनस्यारी के सरमोली में कार्य करने आईं पंजाब निवासी मल्लिका विर्दी को हिमनगरी इतना भाया कि वह यहीं की हो कर रह गईं। आज मल्लिका न केवल सरमोली वन पंचायत की सरपंच हैं बल्कि वह होम स्टे के जरिये क्षेत्र की महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सबल बनाने में जुटी हैं।
मल्लिका और केरल निवासी थियो दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ते थे। दोनों ने प्रेम विवाह किया और हिमनगरी पहुंच गए। दोनों को ही प्रकृति के करीब रहने का शौक था। उन्होंने सरमोली में घर बनाया और महिला सशक्तीकरण के कार्य में जुट गए। मल्लिका का कहना है कि महिलाओं का आर्थिक रूप से सबल होना जरूरी है। मल्लिका ने सरमोली और आसपास के गांवों की महिलाओं को साथ लेकर माटी संगठन बनाया। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक रूप से मजबूत करने के साथ ही उन्हें घर के भीतर की हिंसा का भी प्रतिकार करना सिखाया। माटी के माध्यम से बनाए स्वयं सहायता समूहों सौ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। सरमोली को पिथौरागढ़ का पहला होम स्टे गांव होने का भी गौरव उन्होंने दिलाया। वर्तमान में गांव की 20 महिलाएं होम स्टे से जुड़ी हैं। इस वर्ष अब तक सरमोली में 600 से भी अधिक पर्यटक आ चुके हैं।
वर्ष 2017 में महिलाओं को साथ लेकर मल्लिका ने शराब के खिलाफ सशक्त अभियान चलाया। इसमें 3500 से अधिक महिलाओं ने प्रत्यक्ष भागीदारी की। उन्होंने लोगों में जंगलों के प्रति लगाव पैदा किया। उनका मानना है कि प्रकृति से हम लेना ही नहीं बल्कि देना भी सीखें। बकौल मल्लिका जिस डाल में हम बैठे हैं उसका संरक्षण बेहद जरूरी है। उनके साथ कार्य कर रहीं जैंती वन पंचायत की पंच रेखा रौतेला वर्ड गाइड हैं। गोरी घाटी क्षेत्र में पाई जाने वाली पक्षियों की 329 प्रजातियों में से दो सौ को वह पहचानती हैं। पुष्पा तुमक्याल उच्च हिमालयी क्षेत्र की नेचर गाइड हैं।
विज्ञापन
शंखधुरा वन पंचायत की सरपंच बसंती रावत होम स्टे से आजीविका चला रही हैं। जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया का कहना है कि होम स्टे में सरमोली की महिलाएं अच्छा काम कर रही हैं। माटी संगठन प्रतिवर्ष महेश्वर कुंड में वन मेला का आयोजन कर जंगलों के प्रति लोगों के मन में लगाव पैदा कर रहा है।
विज्ञापन
मल्लिका और केरल निवासी थियो दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ते थे। दोनों ने प्रेम विवाह किया और हिमनगरी पहुंच गए। दोनों को ही प्रकृति के करीब रहने का शौक था। उन्होंने सरमोली में घर बनाया और महिला सशक्तीकरण के कार्य में जुट गए। मल्लिका का कहना है कि महिलाओं का आर्थिक रूप से सबल होना जरूरी है। मल्लिका ने सरमोली और आसपास के गांवों की महिलाओं को साथ लेकर माटी संगठन बनाया। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक रूप से मजबूत करने के साथ ही उन्हें घर के भीतर की हिंसा का भी प्रतिकार करना सिखाया। माटी के माध्यम से बनाए स्वयं सहायता समूहों सौ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। सरमोली को पिथौरागढ़ का पहला होम स्टे गांव होने का भी गौरव उन्होंने दिलाया। वर्तमान में गांव की 20 महिलाएं होम स्टे से जुड़ी हैं। इस वर्ष अब तक सरमोली में 600 से भी अधिक पर्यटक आ चुके हैं।
विज्ञापन
वर्ष 2017 में महिलाओं को साथ लेकर मल्लिका ने शराब के खिलाफ सशक्त अभियान चलाया। इसमें 3500 से अधिक महिलाओं ने प्रत्यक्ष भागीदारी की। उन्होंने लोगों में जंगलों के प्रति लगाव पैदा किया। उनका मानना है कि प्रकृति से हम लेना ही नहीं बल्कि देना भी सीखें। बकौल मल्लिका जिस डाल में हम बैठे हैं उसका संरक्षण बेहद जरूरी है। उनके साथ कार्य कर रहीं जैंती वन पंचायत की पंच रेखा रौतेला वर्ड गाइड हैं। गोरी घाटी क्षेत्र में पाई जाने वाली पक्षियों की 329 प्रजातियों में से दो सौ को वह पहचानती हैं। पुष्पा तुमक्याल उच्च हिमालयी क्षेत्र की नेचर गाइड हैं।
विज्ञापन
शंखधुरा वन पंचायत की सरपंच बसंती रावत होम स्टे से आजीविका चला रही हैं। जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया का कहना है कि होम स्टे में सरमोली की महिलाएं अच्छा काम कर रही हैं। माटी संगठन प्रतिवर्ष महेश्वर कुंड में वन मेला का आयोजन कर जंगलों के प्रति लोगों के मन में लगाव पैदा कर रहा है।