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Pithoragarh News: फलों से जूस बनाकर सींच रहीं रोजगार की फसल
Mon, 02 Jun 2025 10:58 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 02 Jun 2025 10:58 PM IST
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कनालीछीना फल प्रसंस्करण में माल्टे को छिलने का कार्य करती महिलाएं। स्रोत : रीप
पिथौरागढ़। कनालीछीना ब्लॉक के ध्वज आजीविका समूह की 30 महिलाएं स्थानीय फलों से जूस बनाकर अपनी आर्थिकी में सुधार कर रही हैं। हर महिला मासिक सात हजार और सालाना लगभग 84 हजार रुपये की आमदनी कर रही है।
फल प्रसंस्करण में महिलाओं ने एक साल में माल्टा का तीन हजार लीटर जूस तैयार किया। इससे उनकी ढाई लाख से तीन लाख रुपये की आमदनी हुई। ग्रामोत्थान की सहायता से महिलाएं जूस की ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग के बाद आकर्षक पैकेजिंग करती है। प्रसंस्करण की ओर से स्थानीय बाजार में जूस की सप्लाई की जाती है।
फल प्रसंस्करण माल्टा, बुरांश, कच्चे आम को गोवत्सा, गर्खा, रसैपाटा सहित अन्य स्थानीय क्षेत्रों से क्रय करता है। इससे क्षेत्रीय ग्रामीण भी लाभान्वित होते हैं। महिलाएं बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर काफी कम होते हैं। इसके बावजूद भी वह अपने क्षेत्र में स्थानीय फलों से जूस बनाकर अपनी आजीविका को मजबूत कर रही हैं।
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माल्टा के छिलके की बेंगलूरू में की जाती है बिक्री
महिलाएं माल्टा के छिलके धूप में सुखाने का कार्य करती हैं। इसके बाद फल प्रसंस्करण की सहायता से बेंगलूरू में छिलके को विक्रय किया जाता है। फल प्रसंस्करण के लेखाकार संतोष कुमार ने बताया कि बेंगलूरू में छिलके की काफी मांग है। माल्टा के छिलके को ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने में उपयोग किया जाता है। इससे फल प्रसंस्करण को भी 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। महिलाओं को माल्टा के छिलके का कार्य करने के लिए प्रति किलो पांच रुपये की दर से भुगतान किया जाता है।
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फल प्रसंस्करण में महिलाओं ने एक साल में माल्टा का तीन हजार लीटर जूस तैयार किया। इससे उनकी ढाई लाख से तीन लाख रुपये की आमदनी हुई। ग्रामोत्थान की सहायता से महिलाएं जूस की ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग के बाद आकर्षक पैकेजिंग करती है। प्रसंस्करण की ओर से स्थानीय बाजार में जूस की सप्लाई की जाती है।
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फल प्रसंस्करण माल्टा, बुरांश, कच्चे आम को गोवत्सा, गर्खा, रसैपाटा सहित अन्य स्थानीय क्षेत्रों से क्रय करता है। इससे क्षेत्रीय ग्रामीण भी लाभान्वित होते हैं। महिलाएं बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर काफी कम होते हैं। इसके बावजूद भी वह अपने क्षेत्र में स्थानीय फलों से जूस बनाकर अपनी आजीविका को मजबूत कर रही हैं।
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माल्टा के छिलके की बेंगलूरू में की जाती है बिक्री
महिलाएं माल्टा के छिलके धूप में सुखाने का कार्य करती हैं। इसके बाद फल प्रसंस्करण की सहायता से बेंगलूरू में छिलके को विक्रय किया जाता है। फल प्रसंस्करण के लेखाकार संतोष कुमार ने बताया कि बेंगलूरू में छिलके की काफी मांग है। माल्टा के छिलके को ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने में उपयोग किया जाता है। इससे फल प्रसंस्करण को भी 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। महिलाओं को माल्टा के छिलके का कार्य करने के लिए प्रति किलो पांच रुपये की दर से भुगतान किया जाता है।