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बालाकोट में तार बाड़ में फंसा तेंदुआ

Fri, 22 Mar 2019 11:22 PM IST
kamlesh kamlesh ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़। Published by: kamlesh kamlesh Updated Fri, 22 Mar 2019 11:22 PM IST
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Leopard trapped in wire fences in Balacot
पिथौरागढ़ के बालाकोट में तार के फंदे में फंसा तेंदुआ। - फोटो : पिथौरागढ़
 जिला मुख्यालय के नजदीक बालाकोट गांव में मादा तेंदुआ तार बाड़ में फंस गई। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अल्मोड़ा से ट्रैंकुलाइज करने के लिए मंगाई गई दवा के बाद रात ढाई बजे तेंदुए को सुरक्षित तार से निकाला जा सका। पशु चिकित्सकों ने तेंदुए का उपचार किया। बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया गया।
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बृहस्पतिवार को दिन में 12 बजे के करीब एक मादा तेंदुआ बालाकोट गांव में तार बाड़ में फंस गई। सूचना पर वन रेंजर दिनेश चंद्र जोशी, वन दरोगा कैलाश बासाकोटी, वन रक्षक मनोज सिंह ज्याला, कैलाश सिंह, ज्योति उपाध्याय, डिगर सिंह मौके पर पहुंच गए। वन विभाग को तेंदुए को ट्रैंकुलाइज करने के लिए अल्मोड़ा से दवा मंगाई। शाम को चार बजे उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीके जोशी, डॉ. सौरभ भट्ट, डॉ. सुनील गिरी मौके पर पहुंचे। बेहोश करने वाली दवा आने के बाद रात 12 बजे तेंदुए को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू किया गया। रात को ढाई बजे तेंदुए को सुरक्षित निकाल कर पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका उपचार किया। सुबह चार बजे वन विभाग की टीम ने तेंदुए को जंगल में छोड़ दिया गया। वन क्षेत्राधिकारी जोशी ने बताया कि तेंदुआ सात-आठ वर्ष की मादा थी। तेंदुए को जंगल में छोड़े जाने के बाद ग्रामीण भी चैन की नींद सो पाए।
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तेंदुए के कमर में फंसा था तार
पिथौरागढ़। बालाकोट में लगाया गया तार तेंदुए की कमर में फंसा था। तार यदि गर्दन में फंसा होता तो उसकी जान भी जा सकती थी। सड़क से महज 10 मीटर की दूरी पर फंसे तेंदुए से ग्रामीण भी दहशत में थे। तार में फंसा तेंदुआ जोर-जोर से दहाड़ रहा था। इसके चलते उसके करीब जाने की भी हिम्मत किसी को नहीं हुई। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीके जोशी ने बताया कि यदि आसपास पत्थर या चट्टान होती तो तेंदुआ उसमें सिर टकराने की कोशिश करता। इससे उसकी जान खतरे में पड़ सकती थी। उन्होंने बताया कि तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ था। करीब 80 किलो वजनी तेंदुए के दांत और पंजे सुरक्षित थे। ब्यूरो
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