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विद्यार्थियों ने ली खेती, रखरखाव के पारंपरिक तरीकों की जानकारी
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 20 Sep 2016 10:47 PM IST
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विद्यार्थियों ने ली खेती, रखरखाव के पारंपरिक तरीकों की जानकारी
- फोटो : अमर उजाला
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अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर हरी सिंह थापा राजकीय हाईस्कूल नैनीसैनी के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के अंतर्गत अपनी लघु शोध परियोजना तैयार करने के लिए नैनी और कनारी गांवों का भ्रमण कर खेती, रखरखाव आदि के पारंपरिक तरीकों की जानकारी ली।
प्रधानाचार्य मोहन चंद्र पाठक के दिशा-निर्देशन में विद्यार्थियों ने नैनी और कनारी गांवों के ग्रामीणों से मिलकर कृषि पद्धतियों, वनस्पति, जंतु के रख-रखाव, स्वास्थ्य, बागवानी, वन उत्पादनों के प्रयोग, हस्तकौशल क्षेत्रों से संबंधित विषय पर जानकारी प्राप्त की।
जिससे इस पारंपरिक ज्ञान को आज की आवश्यकताओं के अनुसार विकास किया जा सके। विद्यार्थियों ने नैनी गांव में लोकेश, रोहित, गुड्डी देवी, देवकी और कनारी गांव में सुरेंद्र, कमला देवी, दीपा और पवन से मुलाकात कर पारंपरिक ज्ञान पद्धतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। दल का नेतृत्व कर रहे पंकज सिंह महर ने बताया कि पारंपरिक ज्ञान हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग होता है। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को यह ज्ञान देने के लिए विद्यार्थियों के कार्य की सराहना की।
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बाल वैज्ञानिकों के दल में नेहा, सुनील, साक्षी, आशा महर, कविता भंडारी, पुष्पा लोहिया और सागर महर थे। विद्यार्थियों ने राशन के संग्रह के प्राचीन तरीके, खेती के लिए गोबर के खाद के प्रयोग आदि की विस्तार से जानकारी ली। पहले लोग जानवर ज्यादा पालते थे। इनसे दूध और खाद दोनों प्राप्त हो जाती थी।
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प्रधानाचार्य मोहन चंद्र पाठक के दिशा-निर्देशन में विद्यार्थियों ने नैनी और कनारी गांवों के ग्रामीणों से मिलकर कृषि पद्धतियों, वनस्पति, जंतु के रख-रखाव, स्वास्थ्य, बागवानी, वन उत्पादनों के प्रयोग, हस्तकौशल क्षेत्रों से संबंधित विषय पर जानकारी प्राप्त की।
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जिससे इस पारंपरिक ज्ञान को आज की आवश्यकताओं के अनुसार विकास किया जा सके। विद्यार्थियों ने नैनी गांव में लोकेश, रोहित, गुड्डी देवी, देवकी और कनारी गांव में सुरेंद्र, कमला देवी, दीपा और पवन से मुलाकात कर पारंपरिक ज्ञान पद्धतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। दल का नेतृत्व कर रहे पंकज सिंह महर ने बताया कि पारंपरिक ज्ञान हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग होता है। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को यह ज्ञान देने के लिए विद्यार्थियों के कार्य की सराहना की।
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बाल वैज्ञानिकों के दल में नेहा, सुनील, साक्षी, आशा महर, कविता भंडारी, पुष्पा लोहिया और सागर महर थे। विद्यार्थियों ने राशन के संग्रह के प्राचीन तरीके, खेती के लिए गोबर के खाद के प्रयोग आदि की विस्तार से जानकारी ली। पहले लोग जानवर ज्यादा पालते थे। इनसे दूध और खाद दोनों प्राप्त हो जाती थी।