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Pithoragarh News: छूटे अपने दरो-दीवार, टेंटों और स्कूलों में मनाएंगे त्योहार
Sun, 19 Oct 2025 10:15 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 19 Oct 2025 10:15 PM IST
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थल में प्राथमिक विद्यालय कुमालगांव में रह रहा आपदा प्रभावित रमेश चंद्र जोशी का परिवार। संवाद
पिथौरागढ़/नाचनी/थल/बंगापानी। आपदा ने आशियाना छीन लिया। अब हमारे घर रहने लायक नहीं हैं। हमारा स्थायी विस्थापन अब तक नहीं हुआ। हमें टेंटों और स्कूलों में शिफ्ट किया गया लेकिन अब तक हम इनसे बाहर नहीं निकल सके हैं। हमारी दिवाली टेंटों और स्कूलों में ही मनेगी। यह कहना है जिले के दाफा, गोल्फा और चलमोड़ी के आपदा प्रभावितों का।
तीनों गांवों में आपदा ने कहर बरपाया था। यहां के 28 परिवारों के घर आपदा की भेंट चढ़ गए। इन्हें टेंटों और स्कूलों में शिफ्ट कर सरकारी तंत्र ने अपनी जिम्मेदारी निभा दी। संवाद न्यूज एजेंसी ने इन गांवों में पहुंचकर प्रभावितों के हालातों का जायजा लिया तो उनका दर्द छलक पड़ा। प्रभावितों ने कहा कि न जाने कब हमारा स्थायी विस्थापन होगा और कब फिर से अपनी छत नसीब होगी। इस बार इन्हीं टेंटों और स्कूलों में दिवाली मनाकर जल्द स्थायी विस्थापन की उम्मीद करेंगे।
टेंटों में लग रही ठंड, पड़ोसियों के यहां रहने की मजबूरी
नाचनी। बीते पांच अगस्त को दाफा गांव में आपदा से मोहन सिंह, खुशाल सिंह, उमेद सिंह, मोहन सिंह, केशर राम, बलवंत राम और खुशाल सिंह के मकान टूट गए थे। इन आपदा प्रभावितों को तब टेंटों में शिफ्ट कर दिया गया। सभी आपदा प्रभावितों ने बताया कि ठंड शुरू हो गई है। टेंटों में रहना मुश्किल हो रहा है। दिन के समय तो भोजन टेंटों में पकता है। बच्चों को ठंड से बचाने के लिए रात में पड़ोसियों के यहां रहना मजबूरी बन गया है। संवाद
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चलमोड़ी गांव में 14 परिवार स्कूल और पड़ोसियों के घरों में मनाएंगे त्योहार
थल। बीते 17 सितंबर को चलमोड़ी गांव में भूस्खलन से शंकर दत्त जोशी, जगदीश चंद्र जोशी, तुलसी दत्त जोशी, भाष्कर जोशी, चिंतामणि जोशी, पूरन चंद्र जोशी, रमेश चंद्र जोशी, दीपक चंद्र जोशी, हरीश चंद्र जोशी, लोकमणि जोशी, लक्ष्मी दत्त जोशी, चंद्रकांत जोशी, नंदा बल्लभ जोशी और हरीश जोशी के मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। प्रशासन ने इन घरों में रहने में खतरा बताते हुए प्रभावितों को स्कूलों और टेंटों में शिफ्ट किया। अब भी ये प्रभावित टेंटों और स्कूलों से बाहर नहीं निकल सके हैं। हालांकि कुछ परिवारों को पड़ोसियों के यहां ठिकाना बनाना पड़ा है। प्रभावितों ने कहा कि यदि हमारा भी विस्थापन होता तो हमें भी अपनी छत मिल जाती और हम भी अपने घरों में दिवाली मना पाते। संवाद
गोल्फा के छह परिवारों को तीन साल बाद भी नहीं मिली छत
बंगापानी। गोल्फा गांव में वर्ष 2022 में आई आपदा ने दिवान सिंह, मंगल सिंह, रमेश सिंह, देवेंद्र सिंह, हीरा देवी और दिवान सिंह से आशियाना छीन लिया। तब इन परिवारों को टेंटो में शिफ्ट किया गया था। तब से इनका ठिकाना यही टेंट हैं। प्रभावितों ने कहा कि हर आपदाकाल में हमारे विस्थापन की बात होती है और आपदाकाल बीतते ही सभी बातें हवाई साबित होती हैं। प्रभावितों कहा कि तीन वर्षों से वे लोग परिवार के साथ टेंट में ही दिवाली मनाते हुए विस्थापन की राह देख रहे हैं। संवाद
बोले प्रभावित
मैं और मेरे गांव के आपदा प्रभावित परिवार पिछले तीन वर्षों से टेंटों में रहकर दिवाली मना रहे हैं। हर बार हमारे विस्थापन की बात होती है। समय बीतने के साथ अब तो इसकी भी उम्मीद टूट रही है। - गणेश सिंह, गोल्फा
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इस बार भी हमारी दिवाली टेंट में ही मनेगी। हम विस्थापन की राह देखते-देखते थक चुके हैं। प्रभावितों को राहत पहुंचाने और सुरक्षित विस्थापन की सभी बातें हवाई हैं। - कुंदन सिंह, गोल्फा
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तीनों गांवों में आपदा ने कहर बरपाया था। यहां के 28 परिवारों के घर आपदा की भेंट चढ़ गए। इन्हें टेंटों और स्कूलों में शिफ्ट कर सरकारी तंत्र ने अपनी जिम्मेदारी निभा दी। संवाद न्यूज एजेंसी ने इन गांवों में पहुंचकर प्रभावितों के हालातों का जायजा लिया तो उनका दर्द छलक पड़ा। प्रभावितों ने कहा कि न जाने कब हमारा स्थायी विस्थापन होगा और कब फिर से अपनी छत नसीब होगी। इस बार इन्हीं टेंटों और स्कूलों में दिवाली मनाकर जल्द स्थायी विस्थापन की उम्मीद करेंगे।
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टेंटों में लग रही ठंड, पड़ोसियों के यहां रहने की मजबूरी
नाचनी। बीते पांच अगस्त को दाफा गांव में आपदा से मोहन सिंह, खुशाल सिंह, उमेद सिंह, मोहन सिंह, केशर राम, बलवंत राम और खुशाल सिंह के मकान टूट गए थे। इन आपदा प्रभावितों को तब टेंटों में शिफ्ट कर दिया गया। सभी आपदा प्रभावितों ने बताया कि ठंड शुरू हो गई है। टेंटों में रहना मुश्किल हो रहा है। दिन के समय तो भोजन टेंटों में पकता है। बच्चों को ठंड से बचाने के लिए रात में पड़ोसियों के यहां रहना मजबूरी बन गया है। संवाद
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चलमोड़ी गांव में 14 परिवार स्कूल और पड़ोसियों के घरों में मनाएंगे त्योहार
थल। बीते 17 सितंबर को चलमोड़ी गांव में भूस्खलन से शंकर दत्त जोशी, जगदीश चंद्र जोशी, तुलसी दत्त जोशी, भाष्कर जोशी, चिंतामणि जोशी, पूरन चंद्र जोशी, रमेश चंद्र जोशी, दीपक चंद्र जोशी, हरीश चंद्र जोशी, लोकमणि जोशी, लक्ष्मी दत्त जोशी, चंद्रकांत जोशी, नंदा बल्लभ जोशी और हरीश जोशी के मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। प्रशासन ने इन घरों में रहने में खतरा बताते हुए प्रभावितों को स्कूलों और टेंटों में शिफ्ट किया। अब भी ये प्रभावित टेंटों और स्कूलों से बाहर नहीं निकल सके हैं। हालांकि कुछ परिवारों को पड़ोसियों के यहां ठिकाना बनाना पड़ा है। प्रभावितों ने कहा कि यदि हमारा भी विस्थापन होता तो हमें भी अपनी छत मिल जाती और हम भी अपने घरों में दिवाली मना पाते। संवाद
गोल्फा के छह परिवारों को तीन साल बाद भी नहीं मिली छत
बंगापानी। गोल्फा गांव में वर्ष 2022 में आई आपदा ने दिवान सिंह, मंगल सिंह, रमेश सिंह, देवेंद्र सिंह, हीरा देवी और दिवान सिंह से आशियाना छीन लिया। तब इन परिवारों को टेंटो में शिफ्ट किया गया था। तब से इनका ठिकाना यही टेंट हैं। प्रभावितों ने कहा कि हर आपदाकाल में हमारे विस्थापन की बात होती है और आपदाकाल बीतते ही सभी बातें हवाई साबित होती हैं। प्रभावितों कहा कि तीन वर्षों से वे लोग परिवार के साथ टेंट में ही दिवाली मनाते हुए विस्थापन की राह देख रहे हैं। संवाद
बोले प्रभावित
मैं और मेरे गांव के आपदा प्रभावित परिवार पिछले तीन वर्षों से टेंटों में रहकर दिवाली मना रहे हैं। हर बार हमारे विस्थापन की बात होती है। समय बीतने के साथ अब तो इसकी भी उम्मीद टूट रही है। - गणेश सिंह, गोल्फा
इस बार भी हमारी दिवाली टेंट में ही मनेगी। हम विस्थापन की राह देखते-देखते थक चुके हैं। प्रभावितों को राहत पहुंचाने और सुरक्षित विस्थापन की सभी बातें हवाई हैं। - कुंदन सिंह, गोल्फा