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कनार का जिमतड़ा तोक भी झेल रहा आपदा का दंश
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 11 Jul 2018 10:40 PM IST
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कनार के जिमतरा में खतरे में आए मकान
- फोटो : अमर उजाला
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एक-दो जुलाई की अतिवृष्टि ने छिपलाकेदार के नजदीक स्थित कनार ग्राम पंचायत के जिमतड़ा तोक में भी जबर्दस्त तबाही मचाई। जिमतड़ा में पहाड़ी दरकने से नौ मकान खतरे की जद में आ गए हैं। प्रभावित परिवारों ने अन्यत्र शरण ले रखी है। गांव में बिजली के लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। पोल तिरछे हो गए हैं। गांव में 2 जुलाई से बिजली नहीं है।
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कनार का जमतरा तोक इससे पहले भी आपदा की जद में आ चुका है। 9 अगस्त 2017 को जिमतड़ा में भूस्खलन से मकानों में मलबा घुस गया था। लोगों को भारी क्षति का सामना करना पड़ा था। एक और दो जुलाई को हुई अतिवृष्टि से जिमतड़ा की पहाड़ी बुरी तरह से दरक गई। लोगों के घरों, खेतों में मलबा पट गया।
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गांव के मदन सिंह पुत्र कुशल सिंह, राजेंद्र सिंह पुत्र कुशल सिंह, गंभीर सिंह पुत्र आन सिंह, पुष्कर सिंह पुत्र आन सिंह, दीवान सिंह पुत्र आन सिंह, मोहन सिंह भवान सिंह, चंद्र सिंह पुत्र भवान सिंह, जगत सिंह पुत्र गंगा सिंह, लक्ष्मण सिंह पुत्र गुमान सिंह के मकानों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है, मकान रहने लायक नहीं रह गए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि अब तक उन लोगों को किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। सामाजिक कार्यकर्ता हीरा चिराल ने बताया कि गांव में बिजली की लाइनों को जबर्दस्त क्षति पहुंची हैं। बिजली के पोल तिरछे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को जमतड़ा के लोगों की सुध लेनी चाहिए।
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नाले, मलबे के ढेरों को पार कर टीका लगवाने पहुंची महिलाएं
पिथौरागढ़। सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त होने से जाराजिबली गांव की महिलाएं बच्चों को टीका लगाने के लिए 20 किमी पैदल चलकर बंगापानी पहुंची। महिलाओं को कई उफनते नाले पार करने पड़े। मलबे के ढेरों से गुजरना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता आनंद सिंह ने कहा कि आपदा के 10 दिन बाद भी यातायात बहाल नहीं है। महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।