कैलाश यात्रा मार्ग के दो पड़ाव खत्म होने की आशंका
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कैलाश मानसरोवर पैदल यात्रा मार्ग की जगह सड़क का निर्माण होने के कारण इस बार गाला और सिर्खा पड़ाव खत्म होने की आशंका है। हालांकि कुमाऊं मंडल विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि सड़क से यात्रा होने के बावजूद पड़ावों का विकल्प बना रहेगा। सड़क से यात्रा होने पर पैदल दूरी 24 किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं, इसका असर घोड़े वालों (पोनी) और मजदूरों (पोर्टर्स) की मजदूरी पर पड़ जाएगा। पिछले वर्ष तक पोनी, पोर्टर्स यात्रियों और उनके सामान को 82 किलोमीटर तक पैदल ले जाते थे। इसमें उनको ठीक मजदूरी मिल जाती थी।
उत्तराखंड पोनी पोर्टर्स यूनियन के अध्यक्ष जगत मर्तोलिया ने बृहस्पतिवार को डीएम को पत्र देकर कहा कि पैदल यात्रा पड़ाव खत्म होने का असर पोनी और पोर्टर्स पर पड़ेगा। ऐसे में पोनी और पोर्टर्स को पिछले वर्ष की तरह ही मजदूरी का भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पोनी, पोर्टर्स इस बार भी यात्रियों और उनके सामान को ले जाने का काम करेंगे, लेकिन पैदल दूरी कम होने का असर उन पर नहीं पड़ना चाहिए।
उधर, केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने कहा कि सड़क से यात्रा होने के बावजूद गाला और सिर्खा पड़ाव का अस्तित्व विकल्प के तौर पर बना रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी इस पर फैसला होना है। उन्होंने कहा कि जितने हिस्से पर सुगम सड़क तैयार है, उसमें यात्रियों को वाहनों से ले जाया जाएगा, लेकिन गाला और सिर्खा के पड़ाव खास परिस्थिति के लिए खुले रहेंगे।