संवाद न्यूज़ एजेंसी, धारचूला पिथौरागढ़। चीन सीमा के लिए बन रही सड़क की कटिंग का कार्य पूरा हो गया है। इस सड़क के बनने से कैलाश मानसरोवर और आदि कैलास की यात्रा काफी सुगम हो जाएगी। सीमा तक सड़क का कार्य पूरा होने से सुरक्षा तंत्र भी मजबूत होगा। तवाघाट से लिपुलेख तक कुल 95 किलोमीटर लंबी सड़क में से चीन सीमा के निकट शेष तीन किलोमीटर की कटिंग का काम सुरक्षा की दृष्टि से अभी छोड़ा गया है। चीन सीमा के लिए पिछले एक दशक से भी लंबे समय से सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। तवाघाट से गरबाधार तक 20 किलोमीटर सड़क 65 आरसीसी ग्रिफ ने 2008 से पूर्व कटिंग कर ली थी। गरबाधार से मालपा, बुदि, गुंजी, कालापानी,और लिपुलेख 75 किलोमीटर सड़क का निर्माण जून 2008 में 67 आरसीसी ग्रिफ ने शुरू किया। यह सड़क बीआरओ के हीरक परियोजना के अंतर्गत बनाई जा रही है। तवाघाट से गुंजी तक खड़ी पहाड़ियां और कठोर चट्टाने होने के कारण सड़क कटिंग के काम में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इस सड़क का निर्माण होने से व्यास घाटी के बुदि, गर्ब्यांग, नपलचु, गुंजी, नाबी, रोंकांग, कुटी सहित सात माइग्रेशन वाले गांवों के साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा, आदि कैलाश, ॐ पर्वत, भारत चीन व्यापार सुगम होगा। साथ ही सेना,एसएसबी, और आईटीबीपी के जवानों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी। सड़क की कनेक्टिविटी होने से सीमा पर सुरक्षा तंत्र भी मजबूत होगा। व्यास घाटी के नाबी की प्रधान सनम नबियाल, रोंकांग प्रधान अंजू रोकली, बुदि प्रधान जगत सिंह बुदियाल ने सीमा सड़क संगठन का आभार प्रकट किया है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री के ऑनलाइन उद्घाटन के बाद इन सड़क में सेना और अर्द्धसेना के वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। ग्रिफ के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने बताया कि उदघाटन के समय पिथौरागढ़ में 67 आरसीसी कमांडर कर्नल सोमेंदा बनर्जी, 65 आरसीसी कमाधिकारी ले.प्रदीप कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे।