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स्कूल पहुंचने के लिए ‘खतरे का सफर’
संजू पंत/अमर उजाला, डीडीहाट
Updated Tue, 10 Jul 2018 10:39 PM IST
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डीडीहाट में रास्ते ध्वस्त होने से इस तरह जाना पड़ता है बच्चों को स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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2015 में आई आपदा से ध्वस्त रास्तों की अब तक मरम्मत नहीं हुई है। इस कारण कूटा चौरानी, मदनपुरी सहित कई ग्राम सभाओं के बच्चे रोजाना जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने स्कूल जाते हैं। रास्तों के जोखिम को देखते हुए अभिभावक डरे हैं।
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वनराजि क्षेत्र कूटा चैरानी, मदनपुरी सहित आधे दर्जन के अधिक गांव के 15 से अधिक बच्चे देवीसूना के हाईस्कूल एवं जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने के लिए आते हैं। 2015 में आई आपदा के बाद से देवीसूना को आने वाला पैदल मार्ग कई स्थानों पर टूट गया था। इस टूटे रास्ते के ऊपरी भाग से पत्थर गिरते रहते हैं। वहीं अगर किसी भी बच्चे का पैर इस रास्ते में फिसला तो वह खाई में गिर सकता हैं।
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खेतार कन्याल के क्षेत्र समिति सदस्य महेश कन्याल का कहना है कि इन रास्तों की मरम्मत के लिए 2015 से लगातार शासन-प्रशासन को लिखा है, लेकिन अब तक रास्ता सही नहीं हो पाया है। अभिभावक तेज बारिश में बच्चों को इन रास्तों से स्कूल नहीं भेज रहे हैं। यहां तक कि रास्तों का सुधार नहीं होने से कई अभिभावक अब बच्चों का नाम स्कूल से काटने का मन बना रहे हैं।
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इस मार्ग की मरम्मत के लिए हर साल दैवी आपदा मद से प्रस्ताव बनाकर भेजा जाता है, लेकिन बजट स्वीकृत नहीं होने के कारण इस रास्ते की मरम्मत नहीं हो पा रही है। -एसएस दरियाल, खंड विकास अधिकारी