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Pithoragarh News: मशरूम उत्पादन से दूसरों को भी रोजगार दे रहे जाखपंत के दीपक
Sun, 12 Jan 2025 03:22 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 12 Jan 2025 03:22 AM IST
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मूनाकोट (पिथौरागढ़)। जहां चाह वहां राह इसे सार्थक किया है जाखपंत के दीपक ने। कोरोना के चलते बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी छूटी तो उन्होंने हिम्मत नहीं हारी बल्कि घर लौटकर स्वरोजगार शुरू कर युवाओं को स्वरोजगार की राह दिखाई है। मशरूम उत्पादन के जरिए न केवल उन्होंने अपने लिए स्वरोजगार शुरू किया बल्कि वह अन्य युवाओं को इससे जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हैं।
जाखपंत के दीपक ने पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए पलायन किया और दिल्ली में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी शुरू की। कोविड काल में वह गांव लौटे और कंपनी के काम में जुटे रहे। सोच यही थी कि कंपनी के लिए काम करने के बजाय स्वरोजगार शुरू कर इससे अन्य युवाओं को भी जोड़ा जाए।
उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर मशरूम उत्पादन शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने 50 किलो खाद से अपना व्यवसाय शुरू किया। इसके सार्थक परिणाम सामने आए। अब वह हर साल चार टन से अधिक मशरूम का उत्पादन कर ढाई से तीन लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह बटन और आयस्टर मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं इसकी खासी मांग है।
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कहा कि वह अपने साथ गांव के अन्य युवाओं को भी मशरूम उत्पादन से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बताया कि गांव के 10 से अधिक युवाओं ने मशरूम उत्पादन शुरू किया है जो सुखद है। स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार मिलेगा तो इससे पलायन भी रुकेगा।
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आयस्टर मशरूम सुखाकर भेजा जा रहा है दिल्ली
मूनाकोट। दीपक ने बताया कि आयस्टर की स्थानीय स्तर पर अधिक मांग नहीं है। दिल्ली में इसकी खासी मांग होने से इसे सुखाकर वहां भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य गांव में ही 10 टन से अधिक मशरूम उत्पादन करने का है इससे ग्रामीणों की आर्थिकी मजबूत होगी। युवा इससे जुड़ेंगे और उन्हें रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
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जाखपंत के दीपक ने पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए पलायन किया और दिल्ली में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी शुरू की। कोविड काल में वह गांव लौटे और कंपनी के काम में जुटे रहे। सोच यही थी कि कंपनी के लिए काम करने के बजाय स्वरोजगार शुरू कर इससे अन्य युवाओं को भी जोड़ा जाए।
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उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर मशरूम उत्पादन शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने 50 किलो खाद से अपना व्यवसाय शुरू किया। इसके सार्थक परिणाम सामने आए। अब वह हर साल चार टन से अधिक मशरूम का उत्पादन कर ढाई से तीन लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह बटन और आयस्टर मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं इसकी खासी मांग है।
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कहा कि वह अपने साथ गांव के अन्य युवाओं को भी मशरूम उत्पादन से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बताया कि गांव के 10 से अधिक युवाओं ने मशरूम उत्पादन शुरू किया है जो सुखद है। स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार मिलेगा तो इससे पलायन भी रुकेगा।
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आयस्टर मशरूम सुखाकर भेजा जा रहा है दिल्ली
मूनाकोट। दीपक ने बताया कि आयस्टर की स्थानीय स्तर पर अधिक मांग नहीं है। दिल्ली में इसकी खासी मांग होने से इसे सुखाकर वहां भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य गांव में ही 10 टन से अधिक मशरूम उत्पादन करने का है इससे ग्रामीणों की आर्थिकी मजबूत होगी। युवा इससे जुड़ेंगे और उन्हें रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

खोली में शांतनु का स्वागत करते कांग्रेस कार्यकर्ता। -संवाद