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कुमाऊंनी भाषा को सहेजना सभी की जिम्मेदारी : कसनियाल
Sat, 21 Jun 2025 11:22 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 21 Jun 2025 11:22 PM IST
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जिला पंचायत सभागार में आयोजित कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में साहित्यकार और अन्य लोग। संवाद
पिथौरागढ़। जिला पंचायत सभागार में वरिष्ठ पत्रकार बीडी कसनियाल की अध्यक्षता में दो दिवसीय चतुर्थ कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. दिवा भट्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर इसका शुभारंभ किया।
सुखवासी संगीत वाटिका जाजरदेवल और फुलदेई नाट्य दल समिति के निदेशक धीरज कुमार के नेतृत्व में कलाकारों ने फाग गीत, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। शिक्षाविद डॉ. अशोक पंत ने कहा कि 700 से अधिक लेखक और कवि कुमाऊंनी भाषा में साहित्य की रचना कर रहे हैं। युवा पीढ़ी को इस समृद्ध भाषा के संरक्षण और इसके प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। बीडी कसनियाल ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा को सहेजने के लिए सभी को आगे आना होगा।
कार्यक्रम में नेपाली साहित्यकार कर्णदयाल, गढ़वाली साहित्यकार जगमोहन रावत, आदलि कुशलि पत्रिका की संपादक डॉ. सरस्वती कोहली विशिष्ट अतिथि रहे। संचालन वरिष्ठ साहित्यकार चिंतामणि जोशी ने किया। वहां आदलि कुशलि के प्रचार प्रसार प्रमुख होशियार सिंह ज्याला, युवा साहित्यकार नीरज, गणेश नेपाली, महेश बराल ओमश्री, केशव दत्त भट्ट, गढ़वाली साहित्यकार जयपाल सिंह रावत, सुशील बुढ़ाकोटी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, चंदन प्रेमी, दिनेश ध्यानी, प्रो. सरोज वर्मा आदि थे। संवाद
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सुखवासी संगीत वाटिका जाजरदेवल और फुलदेई नाट्य दल समिति के निदेशक धीरज कुमार के नेतृत्व में कलाकारों ने फाग गीत, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। शिक्षाविद डॉ. अशोक पंत ने कहा कि 700 से अधिक लेखक और कवि कुमाऊंनी भाषा में साहित्य की रचना कर रहे हैं। युवा पीढ़ी को इस समृद्ध भाषा के संरक्षण और इसके प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। बीडी कसनियाल ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा को सहेजने के लिए सभी को आगे आना होगा।
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कार्यक्रम में नेपाली साहित्यकार कर्णदयाल, गढ़वाली साहित्यकार जगमोहन रावत, आदलि कुशलि पत्रिका की संपादक डॉ. सरस्वती कोहली विशिष्ट अतिथि रहे। संचालन वरिष्ठ साहित्यकार चिंतामणि जोशी ने किया। वहां आदलि कुशलि के प्रचार प्रसार प्रमुख होशियार सिंह ज्याला, युवा साहित्यकार नीरज, गणेश नेपाली, महेश बराल ओमश्री, केशव दत्त भट्ट, गढ़वाली साहित्यकार जयपाल सिंह रावत, सुशील बुढ़ाकोटी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, चंदन प्रेमी, दिनेश ध्यानी, प्रो. सरोज वर्मा आदि थे। संवाद
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