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Pithoragarh News: गांव के बच्चों का शहर के स्कूलों में दाखिला लेना मुश्किल
Fri, 05 Jun 2026 11:30 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 05 Jun 2026 11:30 PM IST
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पिथौरागढ़। आईटीई के तहत निर्धन बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा दिलाने की योजना नियमों के फेर में फंस गई है। पर्याप्त सीटें होने के बाद भी विद्यार्थी निजी स्कूलों में आरटीई के तहत दाखिला नहीं ले पा रहे हैं। 1459 सीटों के सापेक्ष अब भी 50 फीसदी विद्यार्थियों ने ही आरटीई के तहत प्रवेश लिया है।
सीमांत जिले में 150 से अधिक निजी स्कूल हैं। इनमें से 75 फीसदी स्कूल शहर और इसके आसपास संचालित हैं। इन विद्यालयों में आरटीई के तहत 1459 निर्धन बच्चों को प्रवेश दिलाया जाना है। विभाग को योजना के तहत 958 आवेदन मिले। इसके सापेक्ष अब तक सिर्फ 742 विद्यार्थियों को ही निजी स्कूलों में प्रवेश मिल सका है। नियमों के मुताबिक एक किलोमीटर दायरे में संचालित निजी स्कूल में संबंधित क्षेत्र के 25 फीसदी निर्धन बच्चों को प्रवेश मिल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में संचालित निजी स्कूलों में सीटें लगभग फुल हो गई हैं। अभिभावकों के लिए कक्षा एक में पढ़ने वाले बच्चे को गांवों से शहर भेजना असंभव है। ऐसे में इन अभिभावकों और बच्चों के लिए आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की योजना दम तोड़ रही है।
पिछले शिक्षा सत्र भी 33 फीसदी सीटें रह गईं थीं रिक्त
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में निर्धन बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाने की मुहिम को पिछले शिक्षा सत्र भी झटका लगा था। पिछले शिक्षा सत्र जिले को आरटीई के तहत 1313 सीटें आवंटित हुई थीं। इसके सापेक्ष केवल 880 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया और 433 सीटें रिक्त रह गईं। पोर्टल को दो अतिरिक्त बार खोलने के बाद भी रिक्त सीटों पर प्रवेश नहीं हो सके।
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कोट
आवेदनों के सापेक्ष विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा रहा है। शासन से तय नियमों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। फिलहाल प्रवेश प्रक्रिया गतिमान है। उम्मीद है आरटीई के तहत प्रवेश बढ़ेंगे। - तरुण कुमार पंत, सीईओ, पिथौरागढ़
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सीमांत जिले में 150 से अधिक निजी स्कूल हैं। इनमें से 75 फीसदी स्कूल शहर और इसके आसपास संचालित हैं। इन विद्यालयों में आरटीई के तहत 1459 निर्धन बच्चों को प्रवेश दिलाया जाना है। विभाग को योजना के तहत 958 आवेदन मिले। इसके सापेक्ष अब तक सिर्फ 742 विद्यार्थियों को ही निजी स्कूलों में प्रवेश मिल सका है। नियमों के मुताबिक एक किलोमीटर दायरे में संचालित निजी स्कूल में संबंधित क्षेत्र के 25 फीसदी निर्धन बच्चों को प्रवेश मिल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में संचालित निजी स्कूलों में सीटें लगभग फुल हो गई हैं। अभिभावकों के लिए कक्षा एक में पढ़ने वाले बच्चे को गांवों से शहर भेजना असंभव है। ऐसे में इन अभिभावकों और बच्चों के लिए आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की योजना दम तोड़ रही है।
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पिछले शिक्षा सत्र भी 33 फीसदी सीटें रह गईं थीं रिक्त
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में निर्धन बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाने की मुहिम को पिछले शिक्षा सत्र भी झटका लगा था। पिछले शिक्षा सत्र जिले को आरटीई के तहत 1313 सीटें आवंटित हुई थीं। इसके सापेक्ष केवल 880 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया और 433 सीटें रिक्त रह गईं। पोर्टल को दो अतिरिक्त बार खोलने के बाद भी रिक्त सीटों पर प्रवेश नहीं हो सके।
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आवेदनों के सापेक्ष विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा रहा है। शासन से तय नियमों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। फिलहाल प्रवेश प्रक्रिया गतिमान है। उम्मीद है आरटीई के तहत प्रवेश बढ़ेंगे। - तरुण कुमार पंत, सीईओ, पिथौरागढ़