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इस बार भाइयों की कलाइयों पर सजेगी रिंगाल की राखियां
Sat, 06 Jul 2019 10:22 PM IST
kamlesh kamlesh
अमर उजाला, ब्यूराे/पिथौरागढ़।
अमर उजाला, ब्यूराे/पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Sat, 06 Jul 2019 10:22 PM IST
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मुनस्यारी के जैंती गांव में रिंगाल से राखी बनाती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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इस बार भाई-बहन के पवित्र राखी के त्योहार पर बहने अपने भाइयों की कलाइयों पर रिंगाल से निर्मित राखियां बांधेंगी। हस्तशिल्प के क्षेत्र में पिथौरागढ़ जिले में अभिनव प्रयोग कर रही उत्तरापथ संस्था रिंगाल से निर्मित राखियां बाजार में बिक्री के लिए उतारेगी। मुनस्यारी के जैंती गांव में 25 महिलाएं राखी बनाने के काम में जुटी हुई हैं। संस्था रिंगाल से दस से अधिक प्रकार की फैंसी सामग्री तैयार कर रही है। इससे पर्यावरण के लिए खतरा बन चुके प्लास्टिक का प्रयोग कम होने के साथ रिंगाल उद्योग को फिर से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पहाड़ में पहले रिंगाल का बड़ा कारोबार था। इससे चटाइयां, टोकरी, डोके सहित अन्य सामान तैयार किया जाता था। पलायन के चलते खेती-पशुपालन का काम सिमटने से रिंगाल का कारोबार समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। इससे हजारों लोग बेरोजगार हो गए। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के सहयोग से काम कर रही पिथौरागढ़ की उत्तरापथ संस्था ने रिंगाल का नया प्रयोग शुरू किया है।
इसके तहत संस्था की ओर से फैंसी प्रोडक्ट पर्यावरण संवर्द्धन विषय पर मुनस्यारी में महिलाओं को उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले रिंगाल से राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। संस्था के प्रशिक्षक राजेश लाल से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाओं ने रिंगाल से राखी बनाना शुरू कर दिया है। शुरुआत में दो हजार राखियां बाजार में उतारी जाएंगी। एक राखी की कीमत 25 रुपये तय की गई है। इसके अलावा रिंगाल की माला की कीमत 170 रुपये, गले में पहनने वाला लॉकेट 10 रुपये का है। संस्था के कार्डिनेटर पंकज कार्की ने बताया कि प्लास्टिक को रिप्लेस करना और लोगों को स्वरोजगार देना है। इस समय 50 से अधिक लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जुड़े हैं। उत्तराखंड राज्य में रिंगाल से राखी बनाने का काम पहली बार किया जा रहा है।
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12 रुपये में मिलेगी रिंगाल की काफी डिप
पिथौरागढ़। उत्तरापथ संस्था ने रिंगाल की कॉफी डिप भी तैयार की है। 12 रुपये कीमत की इस कॉफी डिप के भीतर कॉफी, चायपत्ती या तेज पत्ता रखकर कप में पेय पदार्थ तैयार किया जा सकता है। घर में इसे एक से अधिक बार भी इस्तेमाल किया जा सकता है। संस्था की ओर से कॉफी डिप के 50 हजार पीस तैयार किए गए हैं। पिथौरागढ़ के सरस बाजार में भी यह कॉफी डिप उपलब्ध होगी।
झूमर, बास्केट और पक्षियों के घौंसले भी तैयार
पिथौरागढ़। रिंगाल से आकर्षक झूमर, बास्केट, डस्टपैन और पक्षियों के घौंसले भी बनाए जा रहे हैं। यह सभी सामान संस्था ग्रामीणों के सहयोग से तैयार करती है। घौंसले की कीमत 300 से 500 तक है। संस्था की ओर से अब तक 42 मेलों में रिंगाल से निर्मित सामग्री के स्टाल लगाए जा चुके हैं। रिंगाल से निर्मित फैंसी सामग्री की बाजार में अच्छी मांग रहती है।
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पहाड़ में पहले रिंगाल का बड़ा कारोबार था। इससे चटाइयां, टोकरी, डोके सहित अन्य सामान तैयार किया जाता था। पलायन के चलते खेती-पशुपालन का काम सिमटने से रिंगाल का कारोबार समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। इससे हजारों लोग बेरोजगार हो गए। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के सहयोग से काम कर रही पिथौरागढ़ की उत्तरापथ संस्था ने रिंगाल का नया प्रयोग शुरू किया है।
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इसके तहत संस्था की ओर से फैंसी प्रोडक्ट पर्यावरण संवर्द्धन विषय पर मुनस्यारी में महिलाओं को उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले रिंगाल से राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। संस्था के प्रशिक्षक राजेश लाल से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाओं ने रिंगाल से राखी बनाना शुरू कर दिया है। शुरुआत में दो हजार राखियां बाजार में उतारी जाएंगी। एक राखी की कीमत 25 रुपये तय की गई है। इसके अलावा रिंगाल की माला की कीमत 170 रुपये, गले में पहनने वाला लॉकेट 10 रुपये का है। संस्था के कार्डिनेटर पंकज कार्की ने बताया कि प्लास्टिक को रिप्लेस करना और लोगों को स्वरोजगार देना है। इस समय 50 से अधिक लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जुड़े हैं। उत्तराखंड राज्य में रिंगाल से राखी बनाने का काम पहली बार किया जा रहा है।
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12 रुपये में मिलेगी रिंगाल की काफी डिप
पिथौरागढ़। उत्तरापथ संस्था ने रिंगाल की कॉफी डिप भी तैयार की है। 12 रुपये कीमत की इस कॉफी डिप के भीतर कॉफी, चायपत्ती या तेज पत्ता रखकर कप में पेय पदार्थ तैयार किया जा सकता है। घर में इसे एक से अधिक बार भी इस्तेमाल किया जा सकता है। संस्था की ओर से कॉफी डिप के 50 हजार पीस तैयार किए गए हैं। पिथौरागढ़ के सरस बाजार में भी यह कॉफी डिप उपलब्ध होगी।
झूमर, बास्केट और पक्षियों के घौंसले भी तैयार
पिथौरागढ़। रिंगाल से आकर्षक झूमर, बास्केट, डस्टपैन और पक्षियों के घौंसले भी बनाए जा रहे हैं। यह सभी सामान संस्था ग्रामीणों के सहयोग से तैयार करती है। घौंसले की कीमत 300 से 500 तक है। संस्था की ओर से अब तक 42 मेलों में रिंगाल से निर्मित सामग्री के स्टाल लगाए जा चुके हैं। रिंगाल से निर्मित फैंसी सामग्री की बाजार में अच्छी मांग रहती है।