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लोक कला सेमिनार में वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति दी
Fri, 08 Mar 2019 10:48 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Fri, 08 Mar 2019 10:48 PM IST
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पिथौरागढ़ में लोक कला सेमीनार में कार्यक्रम प्रस्तुत करते भाव राग ताल के कलकार।
- फोटो : पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ के किले में लोक कलाओं पर आधारित दो दिवसीय सेमिनार का आगाज हो गया है। भाव राग ताल अकादमी पिथौरागढ़ संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहयोग से सेमिनार का आयोजन कर रही है।
भरत लोक रंगोत्सव नाम से शुरू हुए सेमिनार में उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों से आए लोक कला के फनकारों ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में ढोल, नगाड़ा वादन के साथ ही विभिन्न लोक वाद्यों की प्रस्तुति दी गई। लोक कलाकारों ने विशुद्ध लोक संगीत और लोक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति से लोगों का मन मोह लिया। लोक कला की जानकार लक्ष्मी रावत, वशुंधरा नेगी, मनोज ईस्टवाल, रतन असवाल, डॉ. दीपक मेहता, डॉ. ललित पंत, एमपी डोबाल, ललित सिंह पोखरिया, नंद लाल भारती ने लोक वाद्य और लोक गायन शैली की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। कहा कि लोक कला के संरक्षण के लिए सभी लोगों को आगे आना होगा। लोक कला के प्रचार-प्रसार से ही यह विधा जीवित रहेगी।
सेमिनार में उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों से लोक कला के विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं। सेमिनार में बड़ी संख्या में लोक कला के रसिक मौजूद थे। सेमिनार के समापन पर शनिवार को गढ़वाल के लोक नृत्य रम्माण और सोरघाटी (पिथौरागढ़) के मुखौटा नृत्य हिलजात्रा की प्रस्तुति दी जाएगी। शिवानी विश्वकर्मा लोक कला पर आधारित पेंटिंग प्रदर्शनी लगाएंगी।
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भरत लोक रंगोत्सव नाम से शुरू हुए सेमिनार में उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों से आए लोक कला के फनकारों ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में ढोल, नगाड़ा वादन के साथ ही विभिन्न लोक वाद्यों की प्रस्तुति दी गई। लोक कलाकारों ने विशुद्ध लोक संगीत और लोक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति से लोगों का मन मोह लिया। लोक कला की जानकार लक्ष्मी रावत, वशुंधरा नेगी, मनोज ईस्टवाल, रतन असवाल, डॉ. दीपक मेहता, डॉ. ललित पंत, एमपी डोबाल, ललित सिंह पोखरिया, नंद लाल भारती ने लोक वाद्य और लोक गायन शैली की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। कहा कि लोक कला के संरक्षण के लिए सभी लोगों को आगे आना होगा। लोक कला के प्रचार-प्रसार से ही यह विधा जीवित रहेगी।
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सेमिनार में उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों से लोक कला के विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं। सेमिनार में बड़ी संख्या में लोक कला के रसिक मौजूद थे। सेमिनार के समापन पर शनिवार को गढ़वाल के लोक नृत्य रम्माण और सोरघाटी (पिथौरागढ़) के मुखौटा नृत्य हिलजात्रा की प्रस्तुति दी जाएगी। शिवानी विश्वकर्मा लोक कला पर आधारित पेंटिंग प्रदर्शनी लगाएंगी।
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