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लिपुलेख में एयर स्ट्रिप बना सकती है भारतीय वायु सेना
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। भारतीय सीमा के पास चीन जिस तरह से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है, उसे देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। लद्दाख में चल रही तनातनी को देखते हुए लिपुलेख में भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसी के मद्देनजर भारतीय वायु सेना के अधिकारियों की एक टीम ने सीमा का दौरा किया। अधिकारियों के इस दौरे से संभावना जताई जा रही है कि भारतीय वायु सेना कालापानी या लिपुलेख के पास एयर स्ट्रिप बना सकती है। चीन सीमा के निकट एयर स्ट्रिप बनने पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चीन के साथ ही नेपाल सीमा पर नजर रखना और अधिक आसान होगा।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के जवान लिपुलेख से मिलम तक सीमा सुरक्षा में मुस्तैदी से डटे हुए हैं। भारतीय वायु सेना के अधिकारियों की एक टीम ने कालापानी, नाभिढांग और लिपुलेख क्षेत्र का दौरा किया। सूत्रों के अनुसार वायु सेना के अधिकारियों ने चीन और नेपाल दोनों सीमाओं का जायजा लिया। इससे संभावना व्यक्त की जा रही है कि भारतीय वायु सेना सीमा के निकट एयर स्ट्रिप बना सकती है।
पिथौरागढ़ से लगने वाली चीन सीमा तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीक की हवाई पट्टी पिथौरागढ़ के नैनीसैनी में ही है। वर्तमान में भारतीय सेना विमान और चिनूक हेलिकॉप्टर उतारने के लिए इसी हवाई पट्टी का इस्तेमाल करती है।
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दो जेट फाइटरों ने भरी चीन सीमा के निकट उड़ान
डीडीहाट। चीन से चल रही तनातनी के बीच भारतीय सुरक्षा एजेंसियां जमीनी गश्त के साथ ही हवा से भी सीमा पर निगाहें रख रही हैं। वायु सेना के जेट फाइटर लगातार सीमा पर उड़ान भर रहे हैं। मंगलवार को दो जेट फाइटरों ने सीमा की रैकी की। मिलम से लेकर लिपुलेख तक जेट फाइटरों ने उड़ान भरी।
कैलाश मानसरोवर क्षेत्र में मिसाइल बेस बना चुका है चीन
डीडीहाट। लद्दाख में चीनी सैनिक घुसपैठ कर उकसाने वाली हरकतें कर चुके हैं। इसके अलावा, कैलाश मानसरोवर क्षेत्र में चीन मिसाइल बेस बना चुका है। इतना ही नहीं, पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख सीमा के पास एक हजार से अधिक चीनी सैनिकों की तैनाती भी ड्रेगन ने की है। चीन, भारतीय सीमा के निकट जिस तरह से अपनी सैन्य क्षमता विकसित कर रहा है, उसे देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी चीन की किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
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भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के जवान लिपुलेख से मिलम तक सीमा सुरक्षा में मुस्तैदी से डटे हुए हैं। भारतीय वायु सेना के अधिकारियों की एक टीम ने कालापानी, नाभिढांग और लिपुलेख क्षेत्र का दौरा किया। सूत्रों के अनुसार वायु सेना के अधिकारियों ने चीन और नेपाल दोनों सीमाओं का जायजा लिया। इससे संभावना व्यक्त की जा रही है कि भारतीय वायु सेना सीमा के निकट एयर स्ट्रिप बना सकती है।
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पिथौरागढ़ से लगने वाली चीन सीमा तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीक की हवाई पट्टी पिथौरागढ़ के नैनीसैनी में ही है। वर्तमान में भारतीय सेना विमान और चिनूक हेलिकॉप्टर उतारने के लिए इसी हवाई पट्टी का इस्तेमाल करती है।
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दो जेट फाइटरों ने भरी चीन सीमा के निकट उड़ान
डीडीहाट। चीन से चल रही तनातनी के बीच भारतीय सुरक्षा एजेंसियां जमीनी गश्त के साथ ही हवा से भी सीमा पर निगाहें रख रही हैं। वायु सेना के जेट फाइटर लगातार सीमा पर उड़ान भर रहे हैं। मंगलवार को दो जेट फाइटरों ने सीमा की रैकी की। मिलम से लेकर लिपुलेख तक जेट फाइटरों ने उड़ान भरी।
कैलाश मानसरोवर क्षेत्र में मिसाइल बेस बना चुका है चीन
डीडीहाट। लद्दाख में चीनी सैनिक घुसपैठ कर उकसाने वाली हरकतें कर चुके हैं। इसके अलावा, कैलाश मानसरोवर क्षेत्र में चीन मिसाइल बेस बना चुका है। इतना ही नहीं, पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख सीमा के पास एक हजार से अधिक चीनी सैनिकों की तैनाती भी ड्रेगन ने की है। चीन, भारतीय सीमा के निकट जिस तरह से अपनी सैन्य क्षमता विकसित कर रहा है, उसे देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी चीन की किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।