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प्रवास पर छांगरू गए नेपाल के 60 परिवारों के लिए भारत ने खोला सीतापुल
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पुल खुलने के इंतजार में धारचूला झूला पुल के पास जमा लोगों की भीड़। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : PITHORAGARH
धारचूला (पिथौरागढ़)। पैदल मार्ग और सड़क नहीं होने से प्रवास पर छांगरू और तिंकर गए नेपाल के 60 परिवारों को वापस लौटने के लिए फिर भारत में प्रवेश करना पड़ा। भारत ने भी दरियादिली दिखाते हुए कालापानी स्थित सीतापुल को नौ घंटे के लिए खोला। यह सभी परिवार मवेशियों के साथ 23 नवंबर को धारचूला पहुंचेंगे। यहां झूलापुल खोलकर इन्हें नेपाल भेजा जाएगा।
भारतीय जमीन को अपने नक्शे में शामिल करने वाले नेपाल के पास चीन सीमा पर स्थित छांगरू और तिंकर तक जाने के लिए पैदल रास्ते और सड़क तक नहीं है। दार्चुला (नेपाल) के प्रवास पर जाने वाले नेपाली परिवार आज भी भारतीय क्षेत्र से होकर इन गांवों में जाते हैं। इस साल भी कोरोना काल के बावजूद भारत ने इन परिवारों के लिए मई में झूलापुल खोला था। इसके बाद ये परिवार भारतीय क्षेत्र से होते हुए प्रवास पर उच्च हिमालयी क्षेत्र स्थित अपने गांवों जा पाए थे।
नेपाल ने पिछले छह महीनों में दार्चुला से तिंकर छांगरू तक पैदल रास्ते और सड़क निर्माण की काफी कवायद की थी, लेकिन पैदल रास्ता भी नहीं बना सका। प्रवास पर गए 60 परिवारों की वापसी के लिए नेपाल को फिर से भारत से अनुरोध करना पड़ा। रोटी-बेटी के रिश्ते बखूबी निभा रहे भारत ने भी दरियादिली दिखाते हुए बुधवार को नौ घंटे के लिए सीतापुल खुला रखा। सुबह आठ बजे से पांच बजे तक खुले पुल से 60 परिवारों ने अपने मवेशियों और भेड़ बकरियों के साथ भारत में प्रवेश किया। अब ये परिवार 23 नवंबर को धारचूला पहुंचेंगे। इन परिवारों के लिए उस दिन भी झूला पुल खोला जाएगा।
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भारतीय जमीन को अपने नक्शे में शामिल करने वाले नेपाल के पास चीन सीमा पर स्थित छांगरू और तिंकर तक जाने के लिए पैदल रास्ते और सड़क तक नहीं है। दार्चुला (नेपाल) के प्रवास पर जाने वाले नेपाली परिवार आज भी भारतीय क्षेत्र से होकर इन गांवों में जाते हैं। इस साल भी कोरोना काल के बावजूद भारत ने इन परिवारों के लिए मई में झूलापुल खोला था। इसके बाद ये परिवार भारतीय क्षेत्र से होते हुए प्रवास पर उच्च हिमालयी क्षेत्र स्थित अपने गांवों जा पाए थे।
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नेपाल ने पिछले छह महीनों में दार्चुला से तिंकर छांगरू तक पैदल रास्ते और सड़क निर्माण की काफी कवायद की थी, लेकिन पैदल रास्ता भी नहीं बना सका। प्रवास पर गए 60 परिवारों की वापसी के लिए नेपाल को फिर से भारत से अनुरोध करना पड़ा। रोटी-बेटी के रिश्ते बखूबी निभा रहे भारत ने भी दरियादिली दिखाते हुए बुधवार को नौ घंटे के लिए सीतापुल खुला रखा। सुबह आठ बजे से पांच बजे तक खुले पुल से 60 परिवारों ने अपने मवेशियों और भेड़ बकरियों के साथ भारत में प्रवेश किया। अब ये परिवार 23 नवंबर को धारचूला पहुंचेंगे। इन परिवारों के लिए उस दिन भी झूला पुल खोला जाएगा।
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