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जौलजीबी में इनर लाइन लाने की मांग को लेकर क्रमिक अनशन
Mon, 18 Feb 2019 11:26 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , धारचूला (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/ अमर उजाला , धारचूला (पिथौरागढ़)।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Mon, 18 Feb 2019 11:26 PM IST
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धारचूला में ढोल-नगाड़ों के साथ प्रदर्शन करते लोग।
- फोटो : पिथौरागढ़
इनर लाइन को पुन: जौलजीबी लाने की मांग को लेकर सीमांत धारचूला की जनता ने तहसील मुख्यालय में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। पहले दिन महिलाएं अनशन पर बैठीं।
सोमवार को धारचूला बचाओ संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष दिनेश चलाल के नेतृत्व में लोगों ने नगरभर में ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस प्रदर्शन किया। इस दौरान हम सीमा के प्रहरी हैं, नोटिफाइड जरूरी है के नारे लगाए। इसके बाद तहसील परिसर में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। सभा में अनवाल समुदाय के अध्यक्ष गुमान सिंह बिष्ट ने कहा कि सीमांत के नागरिक राष्ट्रीय हितों के लिए चिंतित हैं। रं कल्याण संस्था के महासचिव देवकृष्ण फकलियाल ने कहा कि 1998 में क्षेत्रीय जनता ने इनर लाइन के नियमों के पालन के लिए आंदोलन चला रही है, लेकिन सरकार ने जन भावनाओं के विपरीत इनर लाइन को जौलजीबी से हटाकर छियालेख कर दिया। दिलिंग दारमा सेवा समिति के अध्यक्ष पूरन सेलाल ने कहा कि बाहरी लोगों की आवाजाही से त्रिकोणी सीमा में अवांछित गतिविधियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संदीप बोरा ने कहा कि राष्ट्रीय हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। क्रमिक अनशन में बैठने से पूर्व आंदोलनकारियों ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अनशन में नंदा बिष्ट, उर्मिला गुंज्याल, अंजू रोंकली, जानकी देवी, धनुली बिष्ट बैठीं जबकि कृष्ण गर्ब्याल, बिशन कुटियाल, जयराज बुदियाल, रमेश थलाल, नरेश ग्वाल, सुरेश राम, बिंद्रा देवी, भगवती नबियाल, लक्ष्मी गुंज्याल, प्रेमा कुटियाल, विमला रोंकली निर्मला देवी, रं यूथ फोरम अध्यक्ष पूरन ग्वाल, पूर्व प्रधान गुंजी जसमा गुंज्याल, नगेंद्र कुटियाल आदि शामिल थे।
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सोमवार को धारचूला बचाओ संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष दिनेश चलाल के नेतृत्व में लोगों ने नगरभर में ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस प्रदर्शन किया। इस दौरान हम सीमा के प्रहरी हैं, नोटिफाइड जरूरी है के नारे लगाए। इसके बाद तहसील परिसर में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। सभा में अनवाल समुदाय के अध्यक्ष गुमान सिंह बिष्ट ने कहा कि सीमांत के नागरिक राष्ट्रीय हितों के लिए चिंतित हैं। रं कल्याण संस्था के महासचिव देवकृष्ण फकलियाल ने कहा कि 1998 में क्षेत्रीय जनता ने इनर लाइन के नियमों के पालन के लिए आंदोलन चला रही है, लेकिन सरकार ने जन भावनाओं के विपरीत इनर लाइन को जौलजीबी से हटाकर छियालेख कर दिया। दिलिंग दारमा सेवा समिति के अध्यक्ष पूरन सेलाल ने कहा कि बाहरी लोगों की आवाजाही से त्रिकोणी सीमा में अवांछित गतिविधियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
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एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संदीप बोरा ने कहा कि राष्ट्रीय हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। क्रमिक अनशन में बैठने से पूर्व आंदोलनकारियों ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अनशन में नंदा बिष्ट, उर्मिला गुंज्याल, अंजू रोंकली, जानकी देवी, धनुली बिष्ट बैठीं जबकि कृष्ण गर्ब्याल, बिशन कुटियाल, जयराज बुदियाल, रमेश थलाल, नरेश ग्वाल, सुरेश राम, बिंद्रा देवी, भगवती नबियाल, लक्ष्मी गुंज्याल, प्रेमा कुटियाल, विमला रोंकली निर्मला देवी, रं यूथ फोरम अध्यक्ष पूरन ग्वाल, पूर्व प्रधान गुंजी जसमा गुंज्याल, नगेंद्र कुटियाल आदि शामिल थे।
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