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आब मचलि रामलीलाकि धूम

Fri, 23 Sep 2016 10:38 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 23 Sep 2016 10:38 PM IST
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Incense sticks Mcli Ramleelaki
टकाना की रामलीला के लिए प्रशिक्षण लेते कलाकार - फोटो : अमर उजाला

अघिल 30 सितंबर अमावास्या दिन पितृ विसर्जनाक दगाड़ ये सालाक 16 श्राद्धनक समापन है जालो। वीक अघिन दिन बटि शारदीय नवरात्रि आगाज होलो और पहाड़ में रामलीलाकि धूम मचि जालि। पहाड़कि रामलीला में शास्त्रीय संगीताक आधार पर गायन हुंछ। इन दिनान जिलकि सबसे पुराणि पिथौरागढ़कि रामलीलाक साथै, गंगोलीहाट, थल, डीडीहाट, कनालीछीन समेत तमाम इलाकन में रामलीलाकि तालीम चलि रै। 

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अपण पहाड़ में सबनै पुराणि रामलील अल्मोड़ाकि मानी जांछि। अल्मोड़ाक बद्रेश्वर में वर्ष 1860 में रामलीलाकि नींव पड़ी। अपण सोरघाटीक (पिथौरागढ़) रामलीला ले भौत पुराणि छू। पिथौरागढ़ाक किलाक (किला) नजदीक वर्ष 1897 बटि रामलीला हुंछि। ये बार यो रामलीला 120 वर्ष में प्रवेश करलि। ये बाद गंगोलीहाटकि रामलीला नाम ऊंछ। गंगोलीहाट में वर्ष 1934 बटि रामलीला हुंछि। पिथौरागढ़ाक टकान में वर्ष 1960 बटि रामलीला हुंण लागिरै। अस्कोट, कनालिछिन, थल, डीडीहाट, बेड़ीनाग, चौड़मन्या, जाख समेत तमाम इलाकन में रामलीलाक मंचन करि जां।
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रामलीला सदराक साथै टकानकि रामलीला, गंगोलीहाट, कनालिछिन, डीडीहाट, थल आदि इलाकन में रामलीलाकि तालिम चलि रै। कलाकारन कैं देर रात तक अभिनयक प्रशिक्षण दीई जाणो।
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रामलीलाकि न्याति तालीमक प्रति लै लोगन में काफि रुझान रूंछ। लोग रामलीलाकि तालीम देखणू ले उनान। को कलाकार कस अभिनय करल येक पत्त तालीम में दर्शक लगै लिनी। कुल मिलाभेर एक अक्तूबर बटि अपण पहाड़ रामलील में मगन है।


संरक्षणक उपाय सरकार ले करणै
आब प्रदेश सरकार ले पुराणि रामलीलानक संरक्षणक उपाय करण में लागि रै। पुराणि रामलीलानकैं नकद धनराशि सरकाराक तरफ बटि दी जाणे। टकानाक रामलीला कमेटी अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह महर, रामलीला संरक्षण में लागि रूनी गिरिजा शंकर जोशी, यशवंत महर, गंगोलीहाट रामलीला कमेटीक अध्यक्ष आरपी साह, श्यामाचरण उप्रेती बासूगुरु रामलीला संरक्षणक दिशा में उठाई जानी कदम सराहनीय बतूनी। इन लोगनक कूंण छू कि रामलीला हमरि भारतीय संस्कृति की पछ्याण छू, येक संरक्षण हरहाल में हुण चैंछ।

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