एक घंटा बंद रहा झूलापुल
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नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी और कस्टम विभाग के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता को भोगना पड़ा। भारतीय क्षेत्र से झूलापुल के रास्ते नेपाल को ले जाए जा रहे दो खच्चरों को एसएसबी ने यह कहकर रोक दिया कि भारत से नेपाल को जानवर ले जाने की अनुमति नहीं है, जबकि कस्टम के अधिकारी इस बात पर अड़ गए कि घरेलू उपयोग के लिए मेडिकल चेकअप के बाद खच्चरों को नेपाल ले जाने में कोई प्रतिबंध नहीं है। दोनों महकमों में विवाद इस कदर बढ़ गया कि एसएसबी ने भारत और नेपाल को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय झूलापुल के गेट पर ताले ठोक दिए और आवाजाही बंद कर दी। जिला मुख्यालय से उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद एक घंटे में लोगों की सामान्य आवाजाही के लिए पुल तो खोल दिया गया, लेकिन खच्चरों को नेपाल नहीं ले जाया जा सका।
बताया गया कि बृहस्पतिवार सुबह छह बजे झूलापुल आवागमन के लिए खुलने के बाद करीब 8.30 बजे नेपाल के बैतड़ी निवासी रमेश सार्की, हरीश सार्की झूलाघाट से दो खच्चरों को खरीदकर नेपाल ले जाने के लिए झूलापुल पर पहुंच गए। नेपाल की तरफ खच्चर ले जाने में रोक का हवाला देते हुए पुल पर तैनात एसएसबी के सहायक उपनिरीक्षक नरेंद्र प्रसाद भट्ट ने खच्चरों को रोक दिया। उन्होंने बताया कि एसएसबी के सब एरिया आर्गनाइजर ओमप्रकाश और कंपनी कमांडर राजेंद्र सिंह के सख्त आदेश हैं कि नेपाल को कोई भी जानवर नहीं जाएगा। दूसरी तरफ कस्टम अधीक्षक ओपी तिवारी ने बताया कि खच्चरों को मेडिकल परीक्षण के बाद ही नेपाल ले जाने की अनुमति दी गई है और एसएसबी बेवजह विवाद को बढ़ा रही है। एसएसबी के जवानों ने इस बात पर कोई गौर नहीं किया और झूलापुल को आम लोगों की आवाजाही के लिए ही बंद कर दिया।
सुबह करीब 9.30 बजे एसडीएम अनुराग आर्य ने झूलापुल पर तैनात एसएसबी के जवानों और अधिकारियों से बात की तथा पुल खोलने के लिए कहा। तब जाकर पुल से आवागमन शुरू हो पाया। पुल बंद होने की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी रोहतास सागर मौके पर पहुंचे। व्यापार संघ अध्यक्ष संजीव जोशी, व्यापारी गणेश भट्ट, प्रकाश डिक्टिया, जगदीश जोशी, कमान सिंह खड़ायत, धर्मानंद पंत सहित कई व्यापारी झूलापुल पहुंचे और एसएसबी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। व्यापारियों का आरोप है कि एसएसबी और कस्टम के बीच तालमेल न होने के कारण अक्सर झूलापुल में इस तरह की स्थितियां आती रहती हैं। इसका खामियाजा लोगों को भोगना पड़ता है।
पुल बंद होने से लोग रहे परेशान
भारत और नेपाल को जोड़ने वाला अंतरराष्ट्रीय झूलापुल होने से भारत से नेपाल को जाने वाला रोजमर्रा का सामान दूध, समाचार पत्र, राशन, कपड़ा, सीमेंट आदि काफी देर तक अटका रह गया। नेपाल से कई लोग नौकरी के लिए भारतीय क्षेत्र में आते हैं। इसके अलावा बैतड़ी जिले के सीमावर्ती इलाकों से स्कूली बच्चे भी झूलाघाट आते हैं। उनको भी पुल बंद होने से परेशानी हुई।
एसडीएम की अनुमति के बिना नहीं जाएंगे जानवर
एसडीएम अनुराग आर्य ने कहा कि अब नेपाल के लिए कोई भी जानवर ले जाने से पहले उसका मेडिकल परीक्षण होगा और उसके बाद अनुमति पत्र वह खुद जारी करेंगे। एसएसबी और कस्टम विभाग को इस मामले में पड़ने की जरूरत नहीं है। इधर, बृहस्पतिवार के घटनाक्रम के बाद एसएसबी और कस्टम विभाग के बीच खींचतान और बढ़ गई है। दोनों महकमे एक दूसरे पर दोषारोपण करने लगे हैं।