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सैकड़ों गांवों की हजारों आबादी के साथ अन्याय होगा

Fri, 21 Jul 2017 10:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट Updated Fri, 21 Jul 2017 10:45 PM IST
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Hundreds of villages will have injustice to thousands of people
पंचेश्चर में बहती महाकाली नदी - फोटो : अमर उजाला

भारत-नेपाल सीमा पर महाकाली नदी पर बनने वाले पंचेश्वर बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) आने के बाद डूब क्षेत्र के सबसे बड़े कस्बे झूलाघाट के लोगों को अपनी मातृभूमि को छोड़ने का दर्द परेशान करने लगा है। अब तक तो लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि 60 वर्षों से सुने जा रहे पंचेश्वर बांध के जुमला कभी सच में बदलेगा, लेकिन अब तय है कि बांध बनेगा और हजारों लोग विस्थापित होंगे।

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डीपीआर में उल्लेख है कि सितंबर 2018 से बांध निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। उसके बाद डूब क्षेत्र के लोगों पर विस्थापन की तलवार लटक जाएगी। वहीं, लोग डीपीआर में शामिल किए गए बिंदुओं से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार प्रभावितों को अधर में लटकाने जैसा कदम उठा रही है। यह सैकड़ों गांवों की हजारों आबादी के साथ अन्याय होगा। अमर उजाला ने झूलाघाट के व्यापारियों और आम लोगों की राय इस मसले पर जानने की कोशिश की।
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राय जाने बगैर हर कदम का विरोध होगा
व्यापारी डंबर बिष्ट का कहना है कि हाल के दिनों में पंचेश्वर बांध को लेकर जिस तरह की सक्रियता देखने को मिली है उससे साफ जाहिर है कि सरकार बांध का निर्माण जरूर करेगी, लेकिन डूब क्षेत्र के लोगों की राय जाने बगैर यदि कोई कदम उठाया गया तो उसका कड़ा विरोध होगा। उन्होंने कहा कि आम जनता को संकट में डालने वाली नीति की जमकर खिलाफत होगी।
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विनाशकारी बांध को नहीं बनने देंगे
स्थानीय निवासी भुवन चंद्र भट्ट ने कहा कि पंचेश्वर बांध का पुरजोर विरोध करेंगे। सरकार हजारों लोगों की रोजीरोटी और उनकी संस्कृति को समाप्त कर यदि पंचेश्वर बांध बनाने की जिद करेगी तो उसका विरोध होगा और सरकार अंजाम भुगतने को तैयार रहे। लोग अपनी माटी से न तो अलग होना चाहेंगे और न इस विनाशकारी बांध को बनने देंगे। 

गिरफ्तारी देने से भी नहीं डरेंगे
व्यापारी जगदीश पंगरिया कहना है कि करीब 100 साल से उनके दादा-परदादा झूलाघाट में रह रहे हैं। वह बांध के लिए अपनी मातृभूमि को किसी भी हालत में नहीं छोड़ेंगे। अंतिम सांस तक बांध का विरोध होगा। इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। सरकार ने यदि सख्त कदम उठाया तो गिरफ्तारी देने से भी नहीं डरेंगे। बांध को किसी भी हालत में नहीं बनने दिया जाएगा।

खेतीबाड़ी समाप्त हो जाएगी
टेलर रमेश राम का कहना है कि सरकार ने जो डीपीआर जारी की है, उसमें छोटा व्यवसाय करने वालों के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे हजारों लोग हैं जो महाकाली के किनारे छोटा-मोटा काम वर्षों से कर रहे हैं। ज्यादातर गांव नदी के किनारे हैं। इससे खेतीबाड़ी समाप्त हो जाएगी और लोगों का रोजगार छिन जाएगा। वह कहते हैं कि बांध नहीं बनना चाहिए।


पंचेश्वर बांध के विरोध में बैठक कल
पंचेश्वर बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मेें डूब क्षेत्र के सबसे बड़े कस्बे झूलाघाट का नाम ग्रामीण क्षेत्र में शामिल करने के विरोध में क्षेत्र के लोगों ने 23 जुलाई को अपरान्ह 4 बजे रामलीला मैदान झूलाघाट मेें बैठक आयोजित की है। समाजसेवी जानकी कापड़ी ने बताया कि इसमें अग्रिम रणनीति तय की जाएगी।

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