{"_id":"62af749123b4ac03a6190200","slug":"help-by-govind-in-gic-bansbagad-pithoragarh-news-hld466442751","type":"story","status":"publish","title_hn":"जरूरतमंद बच्चों के लिए भगवान हैं जीआईसी बांसबगड़ के शिक्षक गोविंद सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जरूरतमंद बच्चों के लिए भगवान हैं जीआईसी बांसबगड़ के शिक्षक गोविंद सिंह
विज्ञापन
गोविंद सिंह, शिक्षक, जीआईसी बांसबगड़।
- फोटो : PITHORAGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नाचनी (पिथौरागढ़)। जीआईसी बांसबगड़ के शिक्षक गोविंद सिंह जरूरतमंद और गरीब बच्चों को पढ़ाई के साथ उनकी आर्थिक मदद भी करते हैं। जरूरत के समय बच्चों के साथ खड़े रहते हैं। वह पिछले सात साल से बच्चों की हर प्रकार से मदद कर रहे हैं।
जीआईसी मुनस्यारी के सामाजिक विषय के अध्यापक गोविंद का स्थानांतरण वर्ष 2015 में जीआईसी बांसबगड़ में हुआ। इसके बाद शिक्षक ने क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों का भविष्य सुधारने का निर्णय लिया। वह अपनी तैनाती से हर वर्ष गरीब छात्रों को कॉपी, पैन, ड्रेस अपने खर्च से देते हैं। गरीब बच्चों की फीस भी स्वयं वहन करते हैं। स्कूल के बच्चों को बुखार या अन्य किसी प्रकार की बीमारी होने पर डॉक्टर को दिखाना, उसके बाद उनके मर्ज की दवा भी लाकर उन्हें देना भी उनके जीवन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक का उद्देश्य बच्चों का भविष्य सुधार कर उन्हें सही दिशा में ले जाना है, लेकिन उन बच्चों की समस्याओं को भी जानना एक शिक्षक का कर्तव्य है। कई छात्र कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे में उनका कर्तव्य बनता है कि बच्चे की व्यक्तिगत समस्या को सुलझाकर उनका भविष्य संवारा जाय।
हर शिक्षक को ऐसा होना चाहिए
पिथौरागढ़। शिक्षक के इस कार्य को देखते हुए लोग उनकी सराहना कर रहे हैं। ग्राम प्रधान दीपक जोशी, भावना देवी, मीना दसौनी, तुलसी देवी, राजेंद्र कुमार, दुर्योधन सिंह ने कहा कि हर एक शिक्षक को ऐसा ही होना चाहिए। इससे सरकारी स्कूलों का वजूद बना रहने की उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जीआईसी मुनस्यारी के सामाजिक विषय के अध्यापक गोविंद का स्थानांतरण वर्ष 2015 में जीआईसी बांसबगड़ में हुआ। इसके बाद शिक्षक ने क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों का भविष्य सुधारने का निर्णय लिया। वह अपनी तैनाती से हर वर्ष गरीब छात्रों को कॉपी, पैन, ड्रेस अपने खर्च से देते हैं। गरीब बच्चों की फीस भी स्वयं वहन करते हैं। स्कूल के बच्चों को बुखार या अन्य किसी प्रकार की बीमारी होने पर डॉक्टर को दिखाना, उसके बाद उनके मर्ज की दवा भी लाकर उन्हें देना भी उनके जीवन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक का उद्देश्य बच्चों का भविष्य सुधार कर उन्हें सही दिशा में ले जाना है, लेकिन उन बच्चों की समस्याओं को भी जानना एक शिक्षक का कर्तव्य है। कई छात्र कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे में उनका कर्तव्य बनता है कि बच्चे की व्यक्तिगत समस्या को सुलझाकर उनका भविष्य संवारा जाय।
विज्ञापन
हर शिक्षक को ऐसा होना चाहिए
पिथौरागढ़। शिक्षक के इस कार्य को देखते हुए लोग उनकी सराहना कर रहे हैं। ग्राम प्रधान दीपक जोशी, भावना देवी, मीना दसौनी, तुलसी देवी, राजेंद्र कुमार, दुर्योधन सिंह ने कहा कि हर एक शिक्षक को ऐसा ही होना चाहिए। इससे सरकारी स्कूलों का वजूद बना रहने की उम्मीद है।
विज्ञापन