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घर-घर लगा तो दिए नल, आखिर इनमें कब आएगा जल
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सड़क किनारे बिछाई गई दो-दो पाइप लाइन। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। हर घर नल, हर घर जल योजना के तहत अस्कोट क्षेत्र में नल की टोंटी तो लगा दी गई है लेकिन नलों में पानी कब आएगा, इसका पता नहीं है। घरों में नल लगने के बाद भी लोगों को पानी के लिए नौले धारों या फिर गाड़-गधेरों में जाना पड़ रहा है।
अस्कोट कस्बे और आसपास के गांवों में जड़ियागाड़ नामक स्रोत से पानी की आपूर्ति होती है। दूसरा कोई स्रोत भी नहीं है। जल जीवन मिशन के तहत कुछ पाइप लगाकर आंगन में टोंटी लगा दी गई, लेकिन स्रोत से इन नलों को नहीं जोड़ा गया है। ऐसे में छह माह से नल सूखे हैं। वितरण लाइनों समेत तीन किमी दूरी तक चार-चार इंच की दो-दो लाइनें बिछाई गई है।
लोगों का कहना है कि जब स्रोत से पानी की आपूर्ति ही नहीं हो पा रही थी तो आखिर नलों को बिछाने में करोड़ों रुपये क्यों बहाए गए। क्षेत्र के लिए गोरी गंगा से लिफ्ट योजना ही एकमात्र विकल्प है। इस संबंध में जल संस्थान के अपर सहायक अभियंता कमल कुमार भट्ट ने बताया कि नए जल स्रोत खोजकर पेयजल आपूर्ति की जाएगी।
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नल तो लगा है लेकिन नलों को स्रोत से जोड़े बिना पानी कहां से आएगा। नलों में पानी न आने से दूर के स्रोत या गधेरों से पानी ढोने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। - नंदा देवी।
पानी की नई योजना के नाम पर केवल नल में टोंटी लगाकर छोड़ दिया गया है। छह माह से इन नलों में पानी नहीं आया है। हजारों की आबादी जल संकट से जूझ रही है। - सरिता देवी।
हर घर पेयजल के लिए लाइनें तो बिछाई गईं, लेकिन उनमें पानी नहीं आया है। पहले स्रोत ढूंढा जाता, उसके बाद घरों तक पानी की लाइनें बिछाई जानी चाहिए थी। - नारायण दत्त पंत।
क्षेत्र में पेयजल संकट है। एकमात्र स्रोत से पानी आता है। आबादी बढ़ने से पानी की मांग भी बढ़ी है, लेकिन दूसरा स्रोत नहीं खोजा गया है। घरों में केवल नल बिछाए गए हैं। - नारायण सिंह बिष्ट।
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अस्कोट कस्बे और आसपास के गांवों में जड़ियागाड़ नामक स्रोत से पानी की आपूर्ति होती है। दूसरा कोई स्रोत भी नहीं है। जल जीवन मिशन के तहत कुछ पाइप लगाकर आंगन में टोंटी लगा दी गई, लेकिन स्रोत से इन नलों को नहीं जोड़ा गया है। ऐसे में छह माह से नल सूखे हैं। वितरण लाइनों समेत तीन किमी दूरी तक चार-चार इंच की दो-दो लाइनें बिछाई गई है।
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लोगों का कहना है कि जब स्रोत से पानी की आपूर्ति ही नहीं हो पा रही थी तो आखिर नलों को बिछाने में करोड़ों रुपये क्यों बहाए गए। क्षेत्र के लिए गोरी गंगा से लिफ्ट योजना ही एकमात्र विकल्प है। इस संबंध में जल संस्थान के अपर सहायक अभियंता कमल कुमार भट्ट ने बताया कि नए जल स्रोत खोजकर पेयजल आपूर्ति की जाएगी।
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नल तो लगा है लेकिन नलों को स्रोत से जोड़े बिना पानी कहां से आएगा। नलों में पानी न आने से दूर के स्रोत या गधेरों से पानी ढोने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। - नंदा देवी।
पानी की नई योजना के नाम पर केवल नल में टोंटी लगाकर छोड़ दिया गया है। छह माह से इन नलों में पानी नहीं आया है। हजारों की आबादी जल संकट से जूझ रही है। - सरिता देवी।
हर घर पेयजल के लिए लाइनें तो बिछाई गईं, लेकिन उनमें पानी नहीं आया है। पहले स्रोत ढूंढा जाता, उसके बाद घरों तक पानी की लाइनें बिछाई जानी चाहिए थी। - नारायण दत्त पंत।
क्षेत्र में पेयजल संकट है। एकमात्र स्रोत से पानी आता है। आबादी बढ़ने से पानी की मांग भी बढ़ी है, लेकिन दूसरा स्रोत नहीं खोजा गया है। घरों में केवल नल बिछाए गए हैं। - नारायण सिंह बिष्ट।