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गोल्फा गांव का पुरातात्विक अध्ययन होगा
ब्यूरो/अमर उजाला, मदकोट
Updated Wed, 08 Nov 2017 10:23 PM IST
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मदकोट के गोल्फा गांव में मोदी गार्डन के उद्घाटन के समय मौजूद ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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चीन सीमा से सटे गोल्फा गांव का भ्रमण करने के बाद डीएसबी परिसर नैनीताल के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. गिरधर सिंह नेगी ने कहा कि गोल्फा गांव में कुछ पुरातात्विक अवशेष मिले हैं। इनका अब गहराई से अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोल्फा गांव में करीब 250 साल पहले बड़ा भूस्खलन हुआ था। उसमें कई लोगों की जान गई और कई ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं दब गई। डॉ. नेगी ने ग्राम पंचायत की ओर से विकसित किए गए मोदी गार्डन का भी उद्घाटन किया।
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डॉ. नेगी बुधवार को गोल्फा से 30 किलोमीटर पैदल चलकर मदकोट पहुंचे। उन्होंने कहा कि गोल्फा गांव का ऐतिहासिक दृष्टि से अध्ययन करना बेहद जरूरी है। वह दोबारा गांव का दौरा करेंगे और अपने साथ पुरातत्व विभाग की टीम को भी लाएंगे। उन्होंने कहा कि गोल्फा हिमालयी क्षेत्र का समृद्ध संस्कृति वाला गांव है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यारसागंबू दोहन के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए अन्यथा हिमालय की यह जड़ी आने वाले समय में पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
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डॉ. नेगी ने इस बात पर चिंता जताई कि नेपाल के शिकारी इस क्षेत्र के जंगलों में घुसपैठ कर रहे हैं और दुर्लभ वन्यजीवों का शिकार कर देते हैं। उन्होंने कहा कि इन इलाकों का विकास तभी संभव है, जब सड़क संपर्क होगा। सड़क न होने से स्कूलों में शिक्षक आना नहीं चाहते। इस कारण शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है। शिक्षा, चिकित्सा और सड़क के अभाव में लोग गांव छोड़कर जाने को मजबूर हैं। उन्होंने लोगों द्वारा प्रकृति के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की और नए बगीचे का संरक्षण करने की अपील की।
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