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गणाईगंगोली अस्पताल हुआ डॉक्टर विहीन

Sat, 13 Aug 2016 10:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गणाईगंगोली
ब्यूरो/अमर उजाला, गणाईगंगोली Updated Sat, 13 Aug 2016 10:30 PM IST
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Gnaigangoli a hospital without doctors
गणाईगंगोली अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

गणाईगंगोली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सक एसडी सूंठा को गंगोलीहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया है, इसके बाद गणाईगंगोली अस्पताल डॉक्टर विहीन हो गया है।

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गणाईगंगोली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की घोषणा सरकार पूरा नहीं कर पा रही है। उल्टा अस्पताल की व्यवस्थाएं कम होती जा रही हैं। अस्पताल में तैनात डा. सूंठा के स्थानांतरण पर नाराजगी जताते हुए कूना की प्रधान सुनीता देवी, सिमाली की प्रधान जानकी देवी, कुनलता की प्रधान कल्पना पंत ने कहा कि सरकार और स्वास्थ्य महकमा अल्मोड़ा, बागेश्वर जिले की सीमा से सटे इस इलाके की स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के प्रति कभी गंभीर नहीं रहा।
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लंबे समय से डॉक्टर विहीन गणाईगंगोली अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती होने से लोगों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल रहा था, लेकिन अब डॉक्टर को हटा दिया गया, इससे 40,000 की आबादी की स्वास्थ्य सेवा लड़खड़ा गई है। प्रधानों ने कहा डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. यूएस अधिकारी का कहना है कि शासन के निर्देश पर ही उक्त डॉक्टर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगोलीहाट से गणाईगंगोली भेजा गया था। शासन ने संबद्धता समाप्त कर दी है, इसलिए डॉक्टर को मूल तैनाती स्थल पर भेज दिया गया है।
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गौचर महिला अस्पताल में डॉक्टर नहीं
थल (पिथौरागढ़)। थल के गोचर महिला अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने से क्षेत्र की महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। 114 ग्राम पंचायतों के लिए एकमात्र यही महिला अस्पताल है। वो भी डॉक्टर विहीन है। क्षेत्र के लोग पहले भी डॉक्टर की नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं, मगर शासन-प्रशासन ने एक नहीं सुनी। वरिष्ठ कल्याणकारी समिति के अध्यक्ष दान सिंह देऊपा ने कहा कि अस्पताल में वर्ष 2004 से डॉक्टर नहीं है। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को डॉक्टर की नियुक्ति की मांग को लेकर पत्र भेजे गए, मगर कोई जवाब नहीं आया। वर्ष 2002 में महिला उत्थान के नाम पर बने इस महिला अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने से गंभीर रूप से बीमार मरीजों को 55 किमी दूर जिला मुख्यालय पहुंचाना पड़ता है। समिति के लीलाधर भट्ट, भुवन भट्ट, दान सिंह राणा ने कहा कि शीघ्र ही महिला डॉक्टर की नियुक्ति की जाए।

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