{"_id":"5e9c33188ebc3e78b7131d67","slug":"gate-of-international-suspension-bridge-opened-after-seeing-vasudevs-tears190","type":"story","status":"publish","title_hn":"वासुदेव के आंसू देख खुल गए अंतरराष्ट्रीय झूला पुल के गेट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वासुदेव के आंसू देख खुल गए अंतरराष्ट्रीय झूला पुल के गेट
विज्ञापन
झूलापुल खुलने के बाद नेपाल को जाता वासुदेव भट्ट।
- फोटो : AMAR UJALA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन
धारचूला (पिथौरागढ़)। लॉकडाउन में अंतरराष्ट्रीय झूला पुल बंद होने के कारण अपनी मां के अंतिम संस्कार के लिए नेपाल नहीं जा सके वासुदेव भट्ट के आंसुओं से आखिरकार दोनों राष्ट्रों का प्रशासन पसीज गया। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद बीस दिन बाद अंतरराष्ट्रीय झूला पुल को कुछ समय के लिए खोलकर वासुदेव को नेपाल भेज दिया गया।
बता दें नेपाल के दार्चुला निवासी वासुदेव भट्ट भारत में काम करता था। लॉकडाउन में झूलापुलों के बंद होने के कारण वह पिछले 20 दिनों से राजकीय इंटर कालेज बलुवाकोट में बनाए गए राहत शिविर में रह रहा था। 14 अप्रैल को उसकी मां 65 वर्षीय गोमती देवी का निधन हो गया था। मां के निधन की खबर के बाद उसने अंतिम संस्कार के लिए उसे नेपाल भेजने के लिए प्रशासन के सामने गुहार लगाई लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। वासुदेव के साथ ही उसके दो भाई भी भारत में ही फंसे हुए हैं। बेटों के शीघ्र लौटने की उम्मीद नहीं होने पर नेपाल में परिजनों ने गोमती देवी का अंतिम संस्कार कर दिया था। तब से बलुवाकोट शिविर में रह रहे वासुदेव के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसने शिविर में ही अपनी मां का क्रियाकर्म शुरू कर दिया था। उसकी हालत देख धारचूला के एसडीएम एके शुक्ला ने जिलाधिकारी को स्थिति से अवगत कराया। एसएसबी के अधिकारियों से भी वार्ता की गई। इसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों के बीच वार्ता हुई। रविवार को दिन में एक बजे एसएसबी के अधिकारियों की मौजूदगी में बलुवाकोट अंतरराष्ट्रीय झूला पुल के गेट कुछ देर के लिए खोले गए। इसके बाद वासुदेव को नेपाल भेज दिया गया।
विज्ञापन