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Pithoragarh News: पाताल भुवनेश्वर तक सिमट कर रह गया गंगावली का पर्यटन

Sun, 20 Sep 2026 11:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sun, 20 Sep 2026 11:39 PM IST
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Gangavali's tourism has become confined to Patal Bhuvaneshwar
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। राज्य गठन के 26 साल बीत जाने के बावजूद पौराणिक और प्राकृतिक धरोहरों से समृद्ध गंगावली क्षेत्र अपनी उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है। पर्यटन मानचित्र पर सिर्फ पाताल भुवनेश्वर तक सिमटे इस क्षेत्र में डेढ़ दर्जन से अधिक भव्य गुफाएं मौजूद होने के बाद भी इसे गुफाओं की घाटी के रूप में विकसित नहीं किया जा सका है। रामगंगा और सरयू नदी से घिरे गंगावली क्षेत्र की पहाड़ियों में शैलेश्वर, नागेश्वर, मुक्तेश्वर, कोटेश्वर, लटेश्वर, दानेश्वर जैसी गुफाएं हैं, जिनका उल्लेख स्कंद पुराण के मानस खंड के 501वें श्लोक में भी मिलता है।
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90 के दशक में लगातार प्रकाश में आई इन गुफाओं को लेकर सरकारों ने कोई ठोस योजना नहीं बनाई, इसके चलते ये लावारिस पड़ी हैं। जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर और गुप्तड़ी से 8 किमी दूरी पर स्थित पाताल भुवनेश्वर क्षेत्र की मुख्य गुफा है। 82 सीढ़ियां उतरने के बाद अंदर कल्पवृक्ष, तपस्या में लीन मार्कंडेय ऋषि, सप्त ऋषि मंडल, कामधेनु, काल भैरव की जिह्वा, भीम की गदा, अष्ट कमल, ऐरावत के पैर जैसी प्राकृतिक कलाकृतियां हैं।
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1990 तक यहां मशाल और टॉर्च की रोशनी के सहारे प्रवेश होता था। बाद में मंदिर समिति ने जनरेटर से प्रकाश व्यवस्था की। दूसरी प्रमुख शैलेश्वर गुफा गंगोलीहाट नगर से 6 किमी की चढ़ाई पर शैल पर्वत पर स्थित है। 10 मीटर नीचे उतरने पर खुला स्थान और पारदर्शी शिवलिंग इसका मुख्य आकर्षण है। इसके अलावा भोलेश्वर, महाकलेश्वर, मुक्तेश्वर, बाणेश्वर आदि गुफाएं क्षेत्र में स्थित हैं जो पर्यटन मानचित्र पर आने का इंतजार कर रही हैं।
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रखरखाव, सुविधाओं की कमी है बाधा

एक समय इन गुफाओं में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी थी लेकिन रखरखाव के अभाव, एक गुफा से दूसरी गुफा तक पहुंचने के दुर्गम रास्ते, नागरिक सुविधाओं की कमी और प्रचार-प्रसार न होने से पर्यटक इन गुफाओं तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। हर साल लाखों पर्यटक सिर्फ पाताल भुवनेश्वर देखकर लौट जाते हैं।


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गंगावली क्षेत्र में अन्य गुफाओं की मौजूदगी फिलहाल संज्ञान में नहीं है। पाताल भुवनेश्वर के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए विभाग और सरकार के तरफ से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण किसी भी जगह की आर्थिक और तकनीकी उपयोगिता कितनी है, यह देखा जाना जरूरी है। गंगावली क्षेत्र में यदि इसकी संभावना है तो इसका सर्वे कराया जाएगा। अतुल भंडारी, उप निदेशक, पर्यटन विभाग, पिथौरागढ़
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