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चार माह बाद भी नहीं बनी अस्पताल की छत

Fri, 23 Sep 2016 10:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अस्कोट
ब्यूरो/अमर उजाला, अस्कोट Updated Fri, 23 Sep 2016 10:24 PM IST
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Four months after the roof of the hospital was not
जर्जर हालत में पहुंचा अस्कोट का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन - फोटो : अमर उजाला

राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा नहीं मिला। अस्पताल की हर तरह से उपेक्षा हो रही है। डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्कोट अस्पताल भवन में पिछले चार महीने से छत नहीं है। ओपीडी बरामदे में चल रही है पर भवन की मरम्मत नहीं कराई जा रही है।

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इस साल 23 मई को आंधी-तूफान से राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्कोट के दवाई स्टोर और कार्यालय के एक कमरे की छत उड़ गई थी, इसकी मरम्मत अब तक नहीं हुई है। छत उड़ने के बाद दवाएं तो अन्य कमरे में रख दी गई, लेकिन ओपीडी की कोई व्यवस्था नहीं हुई। अस्पताल भवन के बरामदे में ओपीडी चल रही है। खराब मौसम में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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रिटायर्ड कैप्टन गोपाल सिंह, डिगर सिंह, प्रकाश पाल ने अस्पताल की उपेक्षा पर रोष जताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी, प्रशासनिक अफसर यहां तक कि सरकार भी अस्कोट के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य दिलाने के प्रति गंभीर नहीं है। चार महीने में अस्पताल भवन की छत की मरम्मत न होना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। इन लोगों ने कहा कि 14 नवंबर 2014 को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जौलजीबी मेले के उद्घाटन के अवसर पर अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की घोषणा की, लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हुआ है। उधर, सीएमओ डा. यूएस अधिकारी का कहना है कि अस्पताल भवन की मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत हो गया है। अक्तूबर में मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा।

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